वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर एक बार फिर बड़ा कदम उठाते हुए भारत समेत दुनिया के 17 देशों को बड़ा झटका दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने जबरन श्रम (Forced Labour) से निर्मित उत्पादों के आयात पर नकेल कसने के उद्देश्य से विभिन्न देशों से आने वाले सामान पर 10% से लेकर 12.5% तक अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का ऐलान कर दिया है। इस नए आदेश में भारत को 10 प्रतिशत वाले स्लैब में रखा गया है। यह व्यवस्था लागू हो चुकी है।
धारा 301 के तहत कार्रवाई, 60 अर्थव्यवस्थाएं निशाने पर
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का इस्तेमाल करते हुए कुल 60 वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ इस सख्त कार्रवाई की घोषणा की। वाशिंगटन का कहना है कि अमेरिका बीते लगभग 100 वर्षों से जबरन मजदूरी से तैयार सामान के आयात के खिलाफ सख्त नीतियां अपनाता रहा है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, अब समय आ गया है कि दुनिया भर के व्यापारिक साझेदार भी मानवाधिकारों और श्रम मानकों को लेकर यही कड़ा रुख अपनाएं।
भारत को ऐसे मिली 2.5% की राहत
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन की शुरुआती योजना भारत को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखते हुए 12.5% टैरिफ थमाने की थी। हालांकि, भारत सरकार द्वारा 14 जून को अपनी ‘विदेश व्यापार नीति’ में किए गए रणनीतिक बदलावों ने अहम भूमिका निभाई। भारत ने जबरन श्रम से बने सामान के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। इस नीतिगत फैसले और दोनों देशों के बीच श्रम मानकों पर हुई सकारात्मक बातचीत के बाद वाशिंगटन ने रुख नरम किया और भारत को 10% वाले स्लैब में शामिल किया। इस श्रेणी में भारत के साथ ब्रिटेन, कनाडा, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देश भी मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बना नया कानूनी रास्ता
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाया गया 10% का अस्थायी वैश्विक टैरिफ अपनी 150 दिनों की म्याद पूरी कर रहा था। दरअसल, इसी साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के ‘पारस्परिक शुल्क’ (Reciprocal Tariffs) को असंवैधानिक करार दे दिया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने आपातकालीन प्रावधानों का सहारा लेकर 10% अंतरिम शुल्क लगाया और USTR को धारा 301 के तहत नई जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे।
भारत ने दर्ज कराया कड़ा ऐतराज, निर्यातकों की बढ़ी चिंता
भारत ने अमेरिकी प्रशासन की इस एकतरफा जांच और टैरिफ थोपने के फैसले पर आधिकारिक रूप से कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय पक्ष का स्पष्ट कहना है कि ऐसे संवेदनशील और नीतिगत विषयों को एकतरफा फैसलों के बजाय दोनों देशों के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade Talks) के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार और दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वस्तुओं का व्यापार करीब 141 अरब डॉलर रहा था, जिसमें भारत ने अकेले 87.3 अरब डॉलर का सामान अमेरिका भेजा था। ऐसे में 10% अतिरिक्त टैरिफ का सीधा असर भारतीय निर्यातकों के मुनाफे और सामान की प्रतिस्पर्धी कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है।













