पेपर लीक पर केंद्र का बड़ा एक्शन: 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने की तैयारी, फास्ट-ट्रैक कोर्ट से तुरंत मिलेगी सजा

नई दिल्ली: नीट (NEET) समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के बढ़ते मामलों को लेकर केंद्र सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए सरकार कानूनों को अत्यधिक सख्त बनाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़े संदेश के बाद सरकार ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ में संशोधन कर इसे और भी कठोर बनाने की तैयारी में है, ताकि दोषियों में कानून का खौफ पैदा किया जा सके।

5 से 10 साल की सजा और 1 करोड़ का भारी-भरकम जुर्माना

मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नए संशोधनों के तहत पेपर लीक या संगठित परीक्षा धांधली में शामिल पाए जाने वाले आरोपियों को कम से कम 5 से 10 साल तक के कठोर कारावास की सजा का प्रावधान किया जाएगा। इसके अलावा, धांधली में लिप्त संस्थानों और व्यक्तियों पर 1 करोड़ रुपये तक का भारी जुर्माना लगाने की योजना है। वर्तमान में इस कानून के तहत 3 से 5 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। सबसे अहम बात यह है कि इस कानून के तहत दर्ज होने वाले सभी मामले पूरी तरह से गैर-जमानती होंगे, जिससे आरोपियों को आसानी से बेल नहीं मिल सकेगी।

दिल्ली में गठित हुई फास्ट-ट्रैक कोर्ट, अनु ग्रोवर बालिगा बनीं विशेष न्यायाधीश

मामलों को सालों-साल लटकाने के बजाय तय समय-सीमा के भीतर दोषियों को सजा दिलाने के लिए सरकार विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन कर रही है। प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाते हुए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन भी कर दिया है। यह विशेष अदालत दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर से संचालित होगी और अनु ग्रोवर बालिगा इसकी विशेष न्यायाधीश होंगी। अब पेपर लीक या परीक्षा धांधली से जुड़े सभी मामले तुरंत सुनवाई के लिए इसी फास्ट-ट्रैक कोर्ट में भेजे जाएंगे।

पीएम मोदी का वीडियो संदेश: संसद के मॉनसून सत्र में लाया जाएगा नया विधेयक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य और उनके परिजनों के कष्ट को भली-भांति समझती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब से नीट प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आए हैं, तभी से कई कड़े कदम उठाए गए हैं और मुख्य दोषियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। पीएम मोदी ने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता लाखों छात्रों का एक साल बर्बाद होने से बचाना थी, जिसके लिए 22 लाख छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा का पारदर्शी आयोजन सुनिश्चित किया गया। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि संसद के मॉनसून सत्र में जल्द ही एक नया सख्त विधेयक पेश किया जाएगा और सरकार इसे जल्द से जल्द पारित कराने की पूरी कोशिश करेगी।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha