नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण हलफनामा दाखिल कर करीब 67,867 कार्यरत शिक्षकों को बहुत बड़ी राहत दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2020 से नियुक्त होकर प्राथमिक विद्यालयों में सेवाएं दे रहे किसी भी शिक्षक को नौकरी से बाहर नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का संतुलित प्रस्ताव: नई सूची और पदों का समायोजन
सरकार ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशानुसार संशोधित (नई) मेरिट लिस्ट तैयार कर ली गई है। यदि इस नई सूची में कुछ नए पात्र अभ्यर्थी पाए जाते हैं, तो उन्हें उपलब्ध खाली पदों पर समायोजित किया जाएगा। इससे पुराने शिक्षकों की नौकरी भी बची रहेगी और नए पात्र अभ्यर्थियों को भी उनका हक मिल सकेगा।
67,867 शिक्षकों को राहत के साथ सरकार ने रखीं ये 3 शर्तें
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि वह कोर्ट के अंतिम फैसले का पूरी तरह पालन करेगी। हालांकि, कार्यरत शिक्षकों को सुरक्षित रखने और नए अभ्यर्थियों को समायोजित करने के लिए सरकार ने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:
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नए अभ्यर्थी विभाग द्वारा निर्धारित सभी जरूरी योग्यताओं को पूरा करते हों।
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नियुक्ति प्रदान करने के लिए विभाग में रिक्त पद उपलब्ध हों।
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इस विशेष व्यवस्था को केवल इसी भर्ती तक सीमित रखा जाए और भविष्य की किसी भर्ती के लिए इसे नजीर (मिसाल) न माना जाए।
आरक्षण और एमआरसी (MRC) नियम का पूरा विवाद
इस विवाद की शुरुआत वर्ष 2018 में जारी 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती नोटिफिकेशन से हुई थी, जिसकी परीक्षा 6 जनवरी 2019 को हुई थी। मेरिटोरियस रिजर्व कैटेगरी (MRC) के तहत आरक्षित वर्ग के मेधावी उम्मीदवारों को जनरल श्रेणी में समायोजित करने को लेकर मतभेद उभरे। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप था कि OBC वर्ग को 27% के स्थान पर 3.86% और SC वर्ग को 21% की जगह 16.6% आरक्षण ही मिला। दूसरी ओर, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों की दलील थी कि TET या ATRE में कट-ऑफ छूट का लाभ लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को जनरल मेरिट में शामिल न किया जाए।
2020 से 2026 तक: हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का कानूनी सफर
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1 जून 2020: 67,867 चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी हुई; एसटी वर्ग के 1,133 पद खाली रहे।
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5 जनवरी 2022: आरक्षण विसंगतियां दूर करने के लिए 6,800 अभ्यर्थियों की अतिरिक्त सूची जारी, जिस पर बाद में रोक लगी।
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13 मार्च 2023: हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 6,800 अभ्यर्थियों की सूची रद्द कर आरक्षण नियमों में संशोधन के आदेश दिए।
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13 अगस्त 2024: डिविजन बेंच ने 69,000 पदों पर नए सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार करने का फैसला सुनाया।
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9 सितंबर 2024: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई।
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मई-जुलाई 2026: सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर सरकार ने हलफनामा दाखिल कर नए अभ्यर्थियों के समायोजन का फार्मूला पेश किया।
सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकीं निगाहें
राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए इस हलफनामे से 2020 से कार्यरत हजारों शिक्षकों को बड़ी मानसिक राहत मिली है। संशोधित सूची तैयार होने के बाद अब सभी पक्षकारों की निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले और निर्देशों पर टिकी हैं, जिसके बाद ही नए पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया का रास्ता साफ होगा।















