रांची। 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में हुई धांधली के आरोपों के बाद सीआईडी (CID) ने सख्त रुख अपना लिया है। मामले की निष्पक्ष जांच के तहत सीआईडी की टीमों ने सोमवार को एक साथ राज्य के चार बड़े जिलों—रांची, बोकारो, पलामू और हजारीबाग में करीब 15 से 20 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। सीआईडी की यह कार्रवाई परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी में शामिल संदिग्धों, जुटाए गए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर की जा रही है।
रिजल्ट आते ही भड़का छात्रों का गुस्सा, पूरे राज्य में प्रदर्शन
JPSC प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद से ही पूरे झारखंड में अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र सड़कों पर उतरकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं बरती गई हैं, जिससे मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है। अभ्यर्थियों ने परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द करने और आयोग की कार्यप्रणाली में बड़े स्तर पर संरचनात्मक सुधार की मांग की है।
‘केवल जांच काफी नहीं, परीक्षा रद्द होने तक जारी रहेगा अनशन’
आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि केवल सीआईडी जांच शुरू कर देना ही इसका समाधान नहीं है। छात्र नेता महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर अभ्यर्थियों की मांगें सरकार के समक्ष रखीं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब तक राज्य सरकार 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह रद्द नहीं कर देती और आयोग में पारदर्शिता लाने के लिए कड़े कदम नहीं उठाती, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। छात्रों का मानना है कि भर्ती प्रक्रिया में युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए कठोर फैसले लेना जरूरी है।
CBI जांच की मांग और प्राइवेट एजेंसी TDPL पर गंभीर सवाल
प्रदर्शनकारी छात्रों के समूहों ने इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी की जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है। इसके साथ ही, अभ्यर्थियों ने परीक्षा आयोजित कराने वाली प्राइवेट एजेंसी TSR डेटा प्रोसेसिंग लिमिटेड (TDPL) की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। छात्रों का आरोप है कि कंपनी के विवादित ट्रैक रिकॉर्ड के बावजूद उसे इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा का जिम्मा सौंपना सीधे तौर पर पारदर्शिता से समझौता करना था। हालांकि, ये सभी आरोप वर्तमान में जांच का विषय हैं और किसी अदालत द्वारा कंपनी के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं हुआ है।















