135 साल पुराने कानून में बड़ा बदलाव, संसद ने ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल 2026’ को दी मंजूरी; सीतारमण बोलीं- विपक्ष चर्चा से ज्यादा वॉकआउट को देता है महत्व

 

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के 16वें दिन मंगलवार, 10 अगस्त 2026 को ‘द बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ को संसद की मंजूरी मिल गई। केंद्र सरकार की ओर से यह विधेयक पिछले सप्ताह 3 अगस्त को लोकसभा में पेश किया गया था, जहां 4 अगस्त को इसे पारित कर दिया गया। इसके बाद विधेयक को राज्यसभा में चर्चा के लिए भेजा गया, जहां इसे मंजूरी मिलने के साथ ही अब इसके कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है।

विपक्ष पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का निशाना

विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण और सुधार से जुड़े विधेयकों पर विपक्ष को गंभीरता से चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष महत्वपूर्ण विधेयकों पर बहस करने के बजाय सदन से वॉकआउट करना ज्यादा पसंद कर रहा है।

सीतारमण ने कहा कि यह एक सुधारात्मक विधेयक है, जो देश को तेज गति से आगे बढ़ाने में मदद करेगा। उनके मुताबिक, ऐसे विधेयकों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि अगर विपक्ष को किसी प्रावधान में सुधार का सुझाव देना है तो उसे चर्चा के दौरान अपनी बात रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को भी सदन की कार्यवाही में भाग लेकर अपनी बात रखनी चाहिए।

135 साल पुराने कानून में क्यों किया गया बदलाव?

‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026’ के जरिए करीब 135 साल पुराने कानून में बदलाव किया गया है। पुराने कानून का मुख्य उद्देश्य बैंक रिकॉर्ड की प्रमाणित प्रतियों को न्यायिक कार्यवाही में साक्ष्य के तौर पर स्वीकार करना था।

इस व्यवस्था से बैंक अधिकारियों को हर मामले में अदालत के सामने बैंक के मूल बही-खाते और रिकॉर्ड पेश करने की जरूरत नहीं पड़ती थी। प्रमाणित प्रतियों के आधार पर भी रिकॉर्ड को कानूनी साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता था।

डिजिटल रिकॉर्ड को भी मिलेगा कानूनी आधार

नए विधेयक में ‘बैंकर्स बुक्स’ की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है। पुराने कानून में मुख्य रूप से लिखित रिकॉर्ड के साथ माइक्रोफिल्म, मैग्नेटिक टेप और अन्य मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक डेटा-रिट्रीवल माध्यमों में सुरक्षित रिकॉर्ड को शामिल किया गया था।

अब नए कानून में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रूप में सुरक्षित बैंक रिकॉर्ड को भी स्पष्ट रूप से दायरे में लाया गया है। इसके अलावा ऑनसाइट, ऑफसाइट, वर्चुअल और क्लाउड लोकेशन पर सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड को भी साक्ष्य के तौर पर मान्यता देने का प्रावधान किया गया है।

बैंकिंग व्यवस्था के डिजिटल बदलाव के अनुरूप कानून

नए विधेयक का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से हो रहे डिजिटल बदलावों के अनुरूप कानूनी व्यवस्था को आधुनिक बनाना है। आज बैंकिंग रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा डिजिटल माध्यमों और क्लाउड आधारित सिस्टम में सुरक्षित रखा जाता है। ऐसे में पुराने कानून में मौजूद प्रावधानों को वर्तमान तकनीकी व्यवस्था के अनुरूप अपडेट करने की जरूरत महसूस की जा रही थी।

संसद से विधेयक पारित होने के बाद अब इसके कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार का मानना है कि नए प्रावधान डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड को कानूनी प्रक्रिया में अधिक स्पष्ट और प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करेंगे।

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