अब बिना इंश्योरेंस नहीं मिलेगा पेट्रोल ! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया बड़ा निर्देश

Supreme Court Fuel Insurance Pilot Project Central Government

नई दिल्ली। बिना वैध बीमा के सड़कों पर वाहन चलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को ऐसे पायलट प्रोजेक्ट पर काम करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत वैध वाहन बीमा नहीं होने पर पेट्रोल पंप से ईंधन देने पर रोक लगाई जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि इस व्यवस्था की शुरुआत दिल्ली से की जा सकती है।

बुधवार को जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ के सामने मामले की सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने चार अगस्त को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर कुछ चिंताएं हैं। इस पर पीठ ने स्पष्ट किया कि पायलट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना होगा।

दिल्ली से शुरू हो सकता है पायलट प्रोजेक्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा कि वह पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। अदालत ने केंद्र सरकार से एक विस्तृत प्रस्ताव भी मांगा है, जिसमें चार अगस्त के आदेश में दिए गए निर्देशों को लागू करने की समयसीमा स्पष्ट हो।

केंद्र के वकील ने बताया कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पंप डीलरों के साथ बैठक करनी होगी। इसके जवाब में अदालत ने पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने पर जोर दिया।

मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।

4 अगस्त के आदेश में क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट ने चार अगस्त को बिना वैध थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर चल रहे वाहनों की संख्या को लेकर चिंता जताई थी। अदालत ने केंद्र को एक ऐसी व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया था, जिसमें वाहन के ईंधन की उपलब्धता को उसके वैध बीमा से जोड़ा जा सके।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं है, तो उसे पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। वाहन मालिक को पहले वैध बीमा कराना होगा और इसके बाद ही ईंधन मिलने की अनुमति होगी।

बिना बीमा वाहनों की पहचान में मिलेगी मदद

अदालत के मुताबिक, ऐसी व्यवस्था लागू होने से बिना वैध बीमा या पंजीकरण के सड़कों पर चलने वाले वाहनों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। साथ ही वाहन मालिकों पर बीमा कराने का दबाव बढ़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की व्यवस्था से मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR कैमरों जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

टोल प्लाजा पर भी ऑटोमैटिक सिस्टम की बात

चार अगस्त के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क दुर्घटनाओं और टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारों का भी संज्ञान लिया था। अदालत ने कुछ चुनिंदा कॉरिडोर पर पायलट प्रोजेक्ट लागू करने की बात कही थी।

इसके तहत टोल प्लाजा पर वाहनों को लंबे समय तक रोकने के बजाय ऑटोमैटिक पहचान प्रणाली के जरिए टोल प्वाइंट से गुजरने वाले वाहनों की पहचान और संबंधित प्रक्रिया पूरी करने का सुझाव दिया गया था।

अब 21 अगस्त को होने वाली सुनवाई में केंद्र सरकार को पायलट प्रोजेक्ट की रूपरेखा और इसे लागू करने की समयसीमा को लेकर अपना प्रस्ताव अदालत के सामने रखना होगा।

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