
नई दिल्ली। देश में प्याज की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल के भीतर प्याज की औसतन खुदरा कीमत में 59 फीसदी का बड़ा उछाल आया है। 24 अगस्त को देशभर में प्याज का औसत खुदरा भाव 43.53 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया, जो पिछले साल इसी अवधि के दौरान 27.37 रुपये प्रति किलो था।
‘कांदा एक्सप्रेस’ से प्रमुख शहरों में पहुंचेगी सप्लाई
कीमतों में आई इस अप्रत्याशित तेजी से जनता को राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘कांदा एक्सप्रेस’ की शुरुआत की है। इस विशेष योजना के तहत देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्र नासिक से मालगाड़ियों के जरिए प्याज की बड़ी खेप सीधे उन बड़े महानगरों तक पहुंचाई जाएगी, जहां मांग ज्यादा है और किल्लत बनी हुई है। सरकार का मकसद परिवहन लागत घटाकर बाजार में तुरंत उपलब्धता बढ़ाना है।
आखिर क्यों अचानक महंगा हुआ प्याज?
प्याज के दाम चढ़ने का मुख्य कारण सप्लाई चेन का प्रभावित होना है। मार्च और अप्रैल के दौरान महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने रबी फसल के भंडारण (स्टॉक) को भारी नुकसान पहुंचाया था। रबी प्याज की सप्लाई ही आमतौर पर मार्च से अक्टूबर तक बाजार की जरूरतों को पूरा करती है। पुराने स्टॉक के खराब होने के कारण बाजार में आवक काफी घट गई।
मानसून की देरी से बुवाई प्रभावित
रबी के बाद आने वाली खरीफ की अगली फसल पर भी मौसम की मार पड़ी है। इस साल मानसून की देरी के कारण किसानों को प्याज की बुवाई देर से करनी पड़ी। खरीफ प्याज की फसल अमूमन सितंबर से नवंबर के बीच मंडियों में पहुंचती है। ऐसे में जब तक नई फसल की आवक पूरी तरह शुरू नहीं होती, तब तक कीमतों पर दबाव बना रहने की आशंका जताई जा रही है।
प्रमुख शहरों में प्याज की दरें (खुदरा तुलना)
| शहर | वर्ष 2025 का भाव | वर्ष 2026 का भाव | बढ़ोतरी (अनुमानित) |
| दिल्ली | ₹35 / किलो | ₹65 / किलो | ~85% |
| चेन्नई | ₹33 / किलो | ₹58 / किलो | ~75% |
त्योहारों की मांग और सरकारी कदम
थोक बाजार में आई तेजी का सीधा असर खुदरा कीमतों पर दिख रहा है। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारियों ने भी स्टॉक बढ़ाना शुरू कर दिया है, जिससे मांग और बढ़ गई। स्थिति को संभालते हुए मंत्रालय ने प्याज की खरीद कीमत मई के ₹12.70 से बढ़ाकर ₹26.45 प्रति किलो कर दी है। अब सभी की निगाहें खरीफ की नई फसल की आवक पर टिकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में कीमतें सामान्य होने की उम्मीद है।













