
नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ व भूस्खलन के बाद स्थिति लगातार नाजुक बनी हुई है। त्रासदी के बीच अब नेपाल-चीन सीमा पर पहाड़ों के ऊपर भूस्खलन के कारण दो नई झीलें बन गई हैं, जिससे एक और बड़े खतरे का साया मंडराने लगा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इनमें से दूसरी झील का पानी बेहद अस्थिर है और इसका प्राकृतिक बांध कभी भी टूट सकता है, जिससे निचले इलाकों में दोबारा तबाही मच सकती है। इस बीच, नेपाल और तिब्बत में आपदा से जान गंवाने वालों का आंकड़ा 633 तक पहुंच चुका है, जबकि 320 भारतीय नागरिकों समेत लगभग 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: एक साथ आ सकता है दोनों झीलों का पानी
नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के ऊपर बनी झीलों पर वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं। भूवैज्ञानिक जेफ्री कार्गेल के अनुसार, पहली झील का बांध शुक्रवार को ही टूट चुका है, जिससे मलबे का भारी सैलाब नीचे आया था। अब दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ता जा रहा है। अगर यह बांध टूटता है, तो इसका पानी पहली झील के रास्ते तेजी से नीचे आएगा और दोहरी तबाही मचाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहली बाढ़ में बहकर आया मलबा करीब 5 लाख डंप ट्रकों के बराबर था। खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।
नेपाल के 5 जिलों में इमरजेंसी घोषित, 80 पुल और सड़कें ध्वस्त
तबाही के व्यापक असर को देखते हुए नेपाल सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित 5 जिलों की 15 स्थानीय निकायों को ‘आपदा प्रभावित-इमरजेंसी क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। इससे राहत और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी। नेपाल राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बाढ़ ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिसमें 80 पुल और 40 किलोमीटर पक्की सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। इससे चीन और भारत से होने वाले व्यापार और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है, जिससे देश के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
तिब्बत का ग्यिरोंग पोर्ट तबाह, लापता 320 भारतीयों और पर्यटकों की खोज तेज
चीन के नियंत्रण वाले तिब्बत में भी बाढ़ से भारी तबाही हुई है। चीनी सरकारी मीडिया द्वारा जारी तस्वीरों के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत व्यापार का प्रमुख केंद्र ‘ग्यिरोंग पोर्ट’ पूरी तरह से कीचड़ और मलबे में तब्दील हो चुका है। यहां 7 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 554 लोग लापता हैं। तिब्बत वाले इलाके में करीब 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।
पीएम राहत कोष में करोड़ों की मदद
आपदा पीड़ितों की मदद के लिए नेपाल के ‘प्रधानमंत्री राहत कोष’ में तेजी से आर्थिक सहायता पहुंच रही है। शुक्रवार शाम तक देश के नौ अलग-अलग बैंकों में कुल 4.38 अरब नेपाली रुपये (लगभग 274 करोड़ भारतीय रुपये) जमा हो चुके हैं। इसके अलावा, विदेशी खातों के जरिए भी करोड़ों रुपये की सहायता राशि कोष में प्राप्त हुई है, जिसका इस्तेमाल प्रभावितों के पुनर्वास में किया जाएगा।














