अब सिर्फ सेना नहीं, पूरा देश लड़ेगा नई तरह की जंग; सीडीएस जनरल सुब्रमणि ने दिया ‘व्होल-ऑफ-नेशन’ सुरक्षा का मंत्र

नई दिल्ली । भविष्य की जंग में मोर्चे पर तैनात सैनिकों के साथ वे लोग भी अहम भूमिका निभाएंगे, जो प्रयोगशालाओं, स्टार्टअप कंपनियों, तकनीकी संस्थानों और उद्योगों में नई क्षमताएं तैयार कर रहे हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने सोमवार को दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ‘व्होल-ऑफ-नेशन’ यानी पूरे देश की साझा ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत बताई।
सीडीएस के मुताबिक सुरक्षा चुनौतियां अब इतनी व्यापक हो गई हैं कि उनका जवाब केवल सैन्य ताकत से नहीं दिया जा सकता। साइबर हमले, आर्थिक दबाव, सूचना युद्ध, तकनीकी निर्भरता और प्रॉक्सी गतिविधियां किसी देश की सुरक्षा को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर सकती हैं।

ऐसे में अगर सेना अपनी जिम्मेदारी निभा भी रही हो, लेकिन डिजिटल नेटवर्क कमजोर हों, महत्वपूर्ण तकनीक के लिए बाहरी निर्भरता ज्यादा हो या संकट के समय उद्योग तेजी से उत्पादन न बढ़ा सके, तो राष्ट्रीय सुरक्षा में खाली जगह बनी रह सकती है।

जनरल सुब्रमणि ने सरकार, सशस्त्र बलों, निजी उद्योग, टेक्नोलॉजी सेक्टर, स्टार्टअप, एमएसएमई और अकादमिक संस्थानों को एक साझा सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। इसका मतलब यह है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को केवल रक्षा प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी मानने के बजाय एक व्यापक राष्ट्रीय परियोजना के रूप में देखा जाए।
स्टार्टअप इस व्यवस्था में खास भूमिका निभा सकते हैं। नई तकनीक पर तेजी से प्रयोग, कम समय में समाधान तैयार करना और बदलती जरूरत के अनुसार उत्पाद में बदलाव उनकी ताकत है। दूसरी ओर, सेना के पास वास्तविक ऑपरेशनल जरूरतों और मैदान का अनुभव है। दोनों के बीच सीधा संपर्क रक्षा नवाचार को ज्यादा उपयोगी बना सकता है।

सीडीएस ने आत्मनिर्भरता को भी राष्ट्रीय मजबूती से जोड़ा। भारत को महत्वपूर्ण रक्षा और तकनीकी क्षमताओं के लिए घरेलू आधार मजबूत करना होगा। इसके लिए बड़े उद्योगों के साथ छोटे कारोबार और शोध संस्थानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।

उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीक का महत्व उसके इस्तेमाल में है। केवल एआई, ड्रोन या कोई अत्याधुनिक प्रणाली हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें तेजी से सैन्य क्षमता में बदलना होगा।
भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था इसलिए कई हिस्सों का जोड़ होगी। सरकार नीतियां और संसाधन देगी, सेना जरूरत बताएगी, उद्योग उत्पादन करेगा, स्टार्टअप नए समाधान देंगे और अकादमिक जगत शोध को आगे बढ़ाएगा।
जनरल सुब्रमणि का ‘व्होल-ऑफ-नेशन’ संदेश इसी बदलाव की ओर इशारा करता है—नई तरह के युद्ध का सामना करने के लिए पूरे देश की क्षमताओं को एक ही रणनीतिक दिशा में जोड़ना होगा।

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