
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य औद्योगिक विकास, निवेश और निर्यात के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश ने ब्रिक्स (BRICS) सदस्य देशों और उनके सहयोगी राष्ट्रों को कुल ₹47,484 करोड़ का भारी-भरकम निर्यात किया है। यह आंकड़ा प्रदेश के लगभग ₹2 लाख करोड़ के कुल वार्षिक निर्यात का 23.7 प्रतिशत है। इसमें मुख्य रूप से ब्रिक्स सदस्य देशों को ₹34,811 करोड़ और सहयोगी-पार्टनर देशों को ₹12,673 करोड़ का माल भेजा गया है।
वैश्विक मंच पर उभरता उत्तर प्रदेश: 21 देशों तक पहुंचे यूपी के उत्पाद
भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के बीच ये आंकड़े बेहद खास माने जा रहे हैं। वर्तमान में ब्रिक्स समूह में 11 सदस्य देश—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं। इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे 10 सहयोगी देशों में भी यूपी निर्मित सामान की भारी मांग है।
यूएई बना सबसे बड़ा खरीदार, सऊदी अरब और मिस्र भी आगे
ब्रिक्स देशों में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है। अकेले यूएई को ₹15,133 करोड़ का निर्यात हुआ, जो ब्रिक्स देशों को भेजे गए कुल सामान का 43.5% है। इसके अलावा अन्य प्रमुख देशों को हुआ निर्यात इस प्रकार है:
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सऊदी अरब: ₹4,938 करोड़
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मिस्र: ₹3,848 करोड़
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इंडोनेशिया: ₹2,670 करोड़
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चीन: ₹2,497 करोड़
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ब्राजील: ₹2,209 करोड़
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दक्षिण अफ्रीका: ₹1,690 करोड़
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रूस: ₹1,584 करोड़
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ईरान: ₹131 करोड़
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इथियोपिया: ₹110 करोड़
सहयोगी राष्ट्रों में वियतनाम और मलेशिया की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी
ब्रिक्स के सहयोगी और पार्टनर देशों की सूची में वियतनाम यूपी के उत्पादों का सबसे बड़ा आयातक रहा, जिसने ₹5,949 करोड़ (46.9%) का व्यापार किया। दूसरे स्थान पर मलेशिया रहा, जहां ₹3,740 करोड़ (29.5%) का सामान निर्यात किया गया। इसके अतिरिक्त उज्बेकिस्तान (₹1,339 करोड़), थाईलैंड (₹733 करोड़), नाइजीरिया (₹730 करोड़), युगांडा (₹114 करोड़), कजाखस्तान (₹49 करोड़), बोलीविया (₹10 करोड़) और बेलारूस (₹8 करोड़) को भी बड़े पैमाने पर निर्यात किया गया।
इलेक्ट्रिकल उपकरण, मशीनरी और गारमेंट्स की जबरदस्त डिमांड
प्रदेश से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं में विविधता देखने को मिली है। ब्रिक्स सदस्य देशों को मुख्य रूप से इलेक्ट्रिकल मशीनरी एवं उपकरण (₹3,894 करोड़), परिधान व वस्त्र सामग्री (₹2,527 करोड़), मशीनरी एवं यांत्रिक उपकरण (₹2,494 करोड़), और कीमती पत्थर व आभूषण (₹2,378 करोड़) भेजे गए। वहीं सहयोगी देशों में इलेक्ट्रिकल सामान (₹928 करोड़), यांत्रिक उपकरण (₹539 करोड़), एल्युमिनियम उत्पाद (₹302 करोड़) और लेदर प्रोडक्ट्स (₹280 करोड़) का निर्यात प्रमुख रहा।
एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों को मिला वैश्विक आधार
योगी सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) पर दिए गए जोर का सीधा फायदा स्थानीय एमएसएमई (MSME) इकाइयों को मिल रहा है। गुणवत्ता नियंत्रण, आधुनिक पैकेजिंग और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग के दम पर यूपी के पारंपरिक और आधुनिक उद्योग अब एशिया, अफ्रीका, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों में अपनी मजबूत धाक जमा रहे हैं।














