ब्रिक्स समिट की संयुक्त घोषणा: सुरक्षा परिषद में भारत का समर्थन, लोकल करेंसी पर जोर और आतंकवाद पर पाकिस्तान को करारा जवाब

 

भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में सर्वसम्मति से ‘न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन’ जारी किया गया। इस ऐतिहासिक घोषणापत्र में वैश्विक आर्थिक सुधारों से लेकर सीमा पार आतंकवाद तक कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर ब्रिक्स देशों ने अपना साझा रुख स्पष्ट किया। सम्मेलन में सबसे प्रमुख बात यह रही कि चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता और बड़ी भूमिका के दावे का पुरजोर समर्थन किया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की दावेदारी

घोषणापत्र के अनुसार, ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों चीन और रूस ने 2022 के बीजिंग और 2023 के जोहान्सबर्ग घोषणापत्रों को दोहराते हुए कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में भारत तथा ब्राजील की अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की आकांक्षाओं का समर्थन करते हैं। इससे वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव की पुष्टि होती है।

आतंकवाद पर ज़ीरो टॉलरेंस और पहलगाम हमले की निंदा

ब्रिक्स देशों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए दर्दनाक आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें 26 मासूमों की जान चली गई थी। घोषणापत्र में साफ कहा गया:

  • सीमा पार आतंकवाद पर सख्ती: आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, टेरर फंडिंग और सेफ हेवंस (सुरक्षित ठिकानों) को पूरी तरह खत्म करने का आह्वान किया गया।

  • नो डबल स्टैंडर्ड्स: आतंकवाद से लड़ाई में किसी भी तरह के दोहरे रवैये (Double Standards) को बर्दाश्त न करने और ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाने पर सहमति बनी।

  • CCIT को तुरंत मंजूरी: भारत द्वारा प्रस्तावित ‘कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म’ (CCIT) को संयुक्त राष्ट्र में जल्द से जल्द पारित करने और यूएन-सूचीबद्ध सभी आतंकियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

लोकल करेंसी व्यापार और ‘ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम’

डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए ब्रिक्स देशों ने ‘ब्रिक्स पेमेंट टास्क फोर्स’ (BPTF) के माध्यम से सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) में व्यापार निपटान और निवेश को बढ़ावा देने का फैसला किया। एक सुरक्षित और तेज़ क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म तैयार किया जाएगा, जिसमें हर देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान होगा।

आर्थिक, तकनीकी और पर्यावरणीय पहल

घोषणापत्र में कई अन्य प्रमुख वैश्विक व वित्तीय सुधारों पर सहमति व्यक्त की गई:

  • गिफ्ट सिटी में ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’: इंश्योरेंस और री-इंश्योरेंस क्षेत्र को मजबूती देने के लिए गुजरात स्थित गिफ्ट सिटी (GIFT City) में ‘ब्रिक्स रिस्क लैब’ स्थापित करने के भारतीय प्रस्ताव की सराहना की गई।

  • ब्रिक्स ग्रेन एक्सचेंज: दुनिया में खाद्य सुरक्षा पक्की करने और फर्टिलाइजर सप्लाई को सुगम बनाने के लिए ब्रिक्स अनाज व्यापार मंच का विचार आगे बढ़ाया गया।

  • कार्बन बॉर्डर टैक्स का विरोध: पर्यावरण के नाम पर लगाए जाने वाले एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों (जैसे CBAM) का कड़ा विरोध किया गया, क्योंकि यह विकासशील देशों के विकास में बाधा डालते हैं।

  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा: भारत के ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (DPI) मॉडल को बढ़ावा देने और ग्लोबल साइबर फ्रॉड सिंडिकेट्स के खिलाफ साझा एक्शन पर सहमति बनी।

  • गाजा संकट व टू-स्टेट सॉल्यूशन: गाजा में तुरंत हिंसा रोकने, मानवीय मदद पहुंचाने और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र के समर्थन को दोहराया गया।

ब्रिक्स के संस्थागत ढांचे को मजबूती देते हुए शिखर सम्मेलन के अंत में वर्ष 2027 में 19वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए चीन को सर्वसम्मति से समर्थन दिया गया।

 

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