हरतालिका तीज पर आज रात भर क्यों किया जाता है जागरण? जानिए इसके पीछे की पौराणिक कथा, धार्मिक महत्व और शिव-पार्वती की अटूट भक्ति का संदेश

नई दिल्ली। सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन का सबसे बड़ा पर्व ‘हरतालिका तीज’ आज देश भर में पूरे श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं। हरतालिका तीज की पूजा और निर्जला व्रत के साथ रात भर जागरण करने की भी एक बेहद खास परंपरा जुड़ी हुई है। मान्यता है कि यह जागरण माता पार्वती की कठोर तपस्या, अटूट संकल्प और निष्ठावान भक्ति का स्मरण कराता है।

माता पार्वती की कठिन तपस्या से जुड़ी है जागरण की परंपरा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए जंगल में जाकर वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में अन्न-जल का त्याग कर कठोर तपस्या की थी। उन्होंने हर विपत्ति को सहते हुए भी अपनी साधना भंग नहीं होने दी। माता पार्वती के इसी त्याग और दृढ़ संकल्प की याद में हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाता है। महिलाएं इस दिन व्रत रखकर माता पार्वती के उसी संयम और साधना का अनुसरण करती हैं।

तीज की रात जागरण क्यों है बेहद खास?

हरतालिका तीज पर रात भर जागने की परंपरा महज एक प्रथा नहीं, बल्कि शिव-पार्वती की भक्ति में लीन होने का एक जरिया है।

  • भजन-कीर्तन और कथा: महिलाएं रात के समय सामूहिक रूप से एकत्रित होकर हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनती हैं और ढोलक-मंजीरों के साथ भगवान शिव और माता पार्वती के मंगल गीत गाती हैं।

  • चार प्रहर की पूजा: कई स्थानों पर हरतालिका तीज की रात शिव-पार्वती की चार प्रहर की विशेष पूजा करने का विधान है, जिसके लिए जागना आवश्यक माना गया है।

  • भक्ति में लीन होना: रात भर जागरण के जरिए महिलाएं अपना ध्यान सांसारिक मोह-माया से हटाकर केवल ईश्वर की आराधना में लगाती हैं।

निर्जला व्रत के साथ धैर्य और संकल्प की परीक्षा

हरतालिका तीज का व्रत अत्यंत कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें महिलाएं पूरे दिन और रात निर्जला (बिना जल ग्रहण किए) उपवास रखती हैं। निर्जला रहकर रात भर जागना महिलाओं के अपार धैर्य, आस्था और संकल्प शक्ति को दर्शाता है। धार्मिक दृष्टिकोण से यह संदेश मिलता है कि व्रत केवल भूखे रहने का नाम नहीं, बल्कि अपनी साधना को पूर्ण निष्ठा और संयम के साथ पूरा करना है।

जागरण का गहरा धार्मिक संदेश

हरतालिका तीज की रात होने वाला यह जागरण महिलाओं को संदेश देता है कि सच्चे मन और दृढ़ निश्चय से मांगी गई हर मनोकामना ईश्वर पूरी करते हैं। जिस प्रकार माता पार्वती ने अपने अटूट संकल्प से भगवान शिव को प्राप्त किया, उसी प्रकार यह जागरण भक्ति, त्याग, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक माना जाता है।

 

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