यूपी चुनाव से पहले सीएम योगी का बड़ा मास्टरस्ट्रोक: भदोही का नाम फिर बदला, ‘संत रविदास नगर भदोही’ रखने का ऐलान

 

भदोही/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वांचल की राजनीति में एक बड़ा कार्ड खेला है। मुख्यमंत्री ने भदोही में आयोजित एक जनसभा के दौरान जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर भदोही’ करने की आधिकारिक घोषणा की। रविवार, 4 अक्टूबर को 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद उन्होंने यह निर्णय जनता के सामने रखा। इससे पहले 29 जुलाई को भी मुख्यमंत्री ने जिले की सांस्कृतिक पहचान को संत रविदास के नाम से जोड़ने के संकेत दिए थे।

योगी सरकार इस फैसले को संत रविदास के प्रति सम्मान, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण से जोड़कर देख रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक इसे वाराणसी से सटे इस क्षेत्र में दलित वोट बैंक को साधने और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।

तीन दशकों का इतिहास: भदोही का नाम बार-बार क्यों बदला?

भदोही जिले के नामकरण का इतिहास लगभग 30 साल पुराना और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों की सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में इसके नाम में बदलाव किए हैं:

  • 30 जून 1994: तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने वाराणसी से अलग करके ‘भदोही’ को एक स्वतंत्र जिला बनाया।

  • 4 दिसंबर 1997: मायावती के नेतृत्व वाली बसपा सरकार ने जिले का नाम बदलकर ‘संत रविदास नगर’ रखा।

  • 1999: तत्कालीन भाजपा सरकार ने संतुलन बनाते हुए इसका नाम ‘संत रविदास नगर भदोही’ कर दिया।

  • 6 दिसंबर 2014: अखिलेश यादव की सपा सरकार ने ‘संत रविदास नगर’ शब्द हटाकर जिले का नाम पुनः सिर्फ ‘भदोही’ कर दिया।

  • 4 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुराने नाम को बहाल करते हुए एक बार फिर इसे ‘संत रविदास नगर भदोही’ नाम देने की घोषणा की।

संत रविदास का नाम और चुनावी सियासत

संत रविदास मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के अग्रदूतों में से एक हैं। उनकी शिक्षाओं का मूल आधार सामाजिक समानता, जातिगत भेदभाव का अंत और मानव कल्याण रहा है। उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के दलित समाज में संत रविदास के प्रति अगाध आस्था और श्रद्धा है।

सीएम योगी ने इस निर्णय को संत रविदास के विचारों से जोड़ते हुए कहा कि संत रविदास ने आध्यात्मिक मार्ग से समाज को जोड़ने का काम किया था। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार की मुफ्त राशन और जनकल्याणकारी योजनाएं संत रविदास के उसी विचार का व्यावहारिक रूप हैं जिसमें उन्होंने हर नागरिक को अन्न और सम्मान मिलने की कामना की थी।

चुनाव से पहले सोशल और इकोनॉमिक बैलेंस

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों का विशेष महत्व रहा है। भाजपा लंबे समय से गैर-जाटव और दलित समुदायों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है। भदोही का नाम बदलने का यह फैसला प्रतीकात्मक रूप से दलित समाज को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश है।

इसके साथ ही सरकार ने जिले की आर्थिक पहचान का भी ख्याल रखा है। भदोही को विश्वभर में ‘कालीन नगरी’ (Carpet City) के रूप में जाना जाता है, जिससे हजारों लोगों का रोजगार और निर्यात जुड़ा हुआ है। नाम में ‘भदोही’ शब्द को बरकरार रखकर सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां के कालीन उद्योग की ब्रांडिंग और ऐतिहासिक पहचान पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

1,340 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का तोहफा और पूर्व सरकारों पर हमला

नाम बदलने के ऐलान के साथ ही मुख्यमंत्री ने भदोही के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 1,340 करोड़ रुपये से अधिक की 112 विकास योजनाओं की सौगात दी।

पूर्ववर्ती सरकारों पर हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में विकास का पैसा सही जगह नहीं पहुंचता था और राज्य की छवि ‘बीमारू’ और ‘दंगामुक्त’ के विपरीत ‘दंगाग्रस्त’ बनी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि डबल इंजन सरकार ने भ्रष्टाचार पर नकेल कसकर उत्तर प्रदेश का नक्शा बदला है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी 6 महीनों में 1 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी जाएंगी और भर्ती प्रक्रिया में अड़चन डालने वालों से सख्त निपटा जाएगा।

 

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