वॉशिंगटन/तेहरान। मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव के बीच युद्ध के और ज्यादा भयानक रूप लेने की आशंका गहरा गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर एक बार फिर बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। दूसरी तरफ, ईरान ने भी पलटवार की खौफनाक रणनीति तैयार कर ली है। ईरानी सुरक्षा अधिकारियों का दावा है कि अगर अमेरिका या इजराइल ने दोबारा हमला किया, तो वे फारस की खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी प्रमुख संचार व इंटरनेट केबलों को तबाह कर देंगे, जिससे वैश्विक डिजिटल व्यवस्था ठप्प हो सकती है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: फिर हो सकती है ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ जैसी सैन्य कार्रवाई
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्लोरिडा में आयोजित एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ जैसा सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन को यही नाम दिया गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह नया हमला कब और किस रूप में किया जाएगा।
ट्रंप ने युद्ध को जल्द खत्म करने के संकेत देते हुए कहा, “अमेरिका के पास इस युद्ध को बहुत जल्दी समाप्त करने की क्षमता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इसे तुरंत खत्म किया जाए या फिर दुश्मन को धीरे-धीरे कमजोर होने दिया जाए।” उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से क्रूड ऑयल की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है और अमेरिका को इस स्थिति से वह सब मिल रहा है जो वह चाहता है।
समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काटने की ईरान की योजना, ग्लोबल नेटवर्क पर मंडराया संकट
अमेरिकी धमकियों के बीच ईरान ने भी बेहद खतरनाक जवाबी योजना बनाई है। दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि यदि ईरान के बुनियादी ढांचे पर दोबारा हमला होता है, तो समुद्र के नीचे बिछी केबलों से लेकर विरोधियों के सैन्य ठिकाने तक कुछ भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद 7 प्रमुख इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है। गौरतलब है कि दुनिया का लगभग 99 प्रतिशत इंटरनेट डेटा समुद्री केबलों के जरिए ही ट्रांसफर होता है। भले ही होर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक बैंडविड्थ का 1 प्रतिशत से कम हिस्सा गुजरता हो, लेकिन एक साथ कई केबल कटने से ग्लोबल इंटरनेट की स्पीड काफी धीमी हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, शेयर बाजार, ऑनलाइन बिजनेस और क्लाउड सर्विसेज बुरी तरह प्रभावित होंगी।
फ्रांस, जर्मनी और तुर्की की चेतावनी: युद्ध फैला तो बिगड़ेगी दुनिया की अर्थव्यवस्था
ईरान पर दोबारा हमले की अमेरिकी आहट के बीच दुनिया के प्रमुख देशों ने गहरी चिंता जताई है। इस्तांबुल में हुई एक अहम बैठक में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सख्त लहजे में कहा कि ईरान पर किसी भी नए हमले से युद्ध पूरे क्षेत्र में भड़क जाएगा, जिसे रोकने का एकमात्र रास्ता केवल कूटनीति और बातचीत है।
वहीं, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने आगाह किया कि तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने भी दोहराया कि यूरोपीय देश ईरान के साथ परमाणु मुद्दे पर कूटनीतिक बातचीत के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
खाड़ी देशों के टेक इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई हब प्रोजेक्ट्स पर भी खतरा
खाड़ी देश (Gulf Countries) जो खुद को भविष्य के बड़े एआई (AI) और डेटा हब के रूप में स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं, इस युद्ध की सीधी जद में आ गए हैं। इस साल मार्च में हुए हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) के दो डेटा सेंटरों और बहरीन में प्रमुख तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा था।
हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक को बनाए रखने के लिए जमीन के रास्ते वैकल्पिक रूट मौजूद हैं और माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) जैसी दिग्गज टेक कंपनियां 2030 तक मध्य पूर्व में कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए 40 करोड़ डॉलर से अधिक का निवेश कर रही हैं। इसके बावजूद, युद्धग्रस्त समुद्री इलाके में क्षतिग्रस्त केबलों की मरम्मत करना बीमा लागत और सुरक्षा अनुमति के कारण बेहद मुश्किल साबित हो सकता है।



















