लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर समाजवादी पार्टी द्वारा उठाए गए सवालों के बाद निर्वाचन आयोग में हड़कंप मच गया है। आजमगढ़ जिले की विधानसभा सीट संख्या 347 में एक ही नाम की कई प्रविष्टियां (डुप्लीकेट नाम) दर्ज होने के मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की जांच में गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। निर्वाचन आयोग ने लापरवाही और लचर निगरानी के आरोप में तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही संविदा कंप्यूटर सहायक और 5 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश जारी किए गए हैं।
10 बार दर्ज था नाम, सपा के आरोप पर हरकत में आया आयोग
इस पूरे सियासी बवंडर की शुरुआत 15 अक्टूबर 2026 को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान आजमगढ़ की 347 नंबर विधानसभा सीट की वोटर लिस्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। सपा का आरोप था कि सूची में ‘विकास यादव’ नाम के एक ही व्यक्ति का नाम 10 बार अलग-अलग जगहों पर दर्ज किया गया है। मामला उछलने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम), आजमगढ़ से 24 घंटे के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की थी।
जांच में चौंकाने वाला खुलासा, 13 बार मिला एक ही नाम
जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट आने के बाद सामने आए तथ्यों ने आयोग के होश उड़ा दिए। वोटर लिस्ट की स्कैनिंग में ‘विकास यादव’ नाम हिंदी में कुल 13 बार दर्ज पाया गया। हालांकि रिपोर्ट में सफाई दी गई कि इनमें से 2 नाम पहले ही हटाए जा चुके थे, जबकि शेष 11 प्रविष्टियां आजमगढ़ के अलग-अलग गांवों के 11 अलग-अलग वास्तविक नागरिकों की पाई गईं। जांच में यह बड़ी गफलत उजागर हुई कि असली विकास यादव को छोड़कर अन्य 10 लोगों के नाम और पते सुधारने के लिए अब फॉर्म-8 भरवाया जा रहा है। वहीं, इसी नाम और पिता के समान नाम वाला एक अन्य मतदाता गोरखपुर की चौरीचौरा विधानसभा का निवासी निकला।
5 BLO और कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त करने का नोटिस
लापरवाही का दायरा साबित होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की है। मतदाता पंजीकरण केंद्र (VROC) के संविदा कंप्यूटर सहायक और 5 बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को मतदाता सूची के सभी कार्यों से तुरंत हटा दिया गया है। इन छह कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त करने के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त, इन कर्मचारियों के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 (Representation of the People Act, 1950) की धारा 32 के तहत आपराधिक लापरवाही का मुकदमा दर्ज करने से पूर्व कारण बताओ नोटिस थमाया गया है।
तीन बड़े प्रशासनिक अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का चाबुक
निचले स्तर के कर्मचारियों के साथ-साथ मतदाता सूची के पर्यवेक्षण में घोर लापरवाही बरतने पर उच्च अधिकारियों पर भी शिकंजा कस गया है। तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) के खिलाफ विभागीय जांच के लिए चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करने का फरमान जारी हुआ है। इन तीनों अधिकारियों के खिलाफ भी लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 32 के तहत कानूनी कार्रवाई से पहले औपचारिक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
आजमगढ़ की सभी विधानसभा सीटों की होगी स्क्रूटनी, 7 दिन में मांगी रिपोर्ट
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरे आजमगढ़ जिले के चुनाव तंत्र पर नजरें टेढ़ी कर ली हैं। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी को आदेश जारी किया है कि आजमगढ़ की सभी विधानसभा सीटों की वोटर लिस्ट की इसी बिंदु (डुप्लीकेट नाम व गलत एंट्री) पर गहनता से री-चेकिंग की जाए। आयोग ने इस विस्तृत स्क्रूटनी रिपोर्ट को 1 सप्ताह के भीतर पेश करने की कड़ी समय सीमा तय की है। चुनाव आयोग की इस सख्त कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और यह देखना दिलचस्प होगा कि कारण बताओ नोटिस का जवाब आने के बाद क्या और कड़ी कार्रवाई की जाती है।


















