पंजाब चुनाव से पहले बड़ा सियासी उलटफेर: बीजेपी-अकाली दल में गठबंधन तय! बठिंडा में पीएम मोदी की रैली से हो सकता है ऐलान

पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति में बेहद हलचल भरा मोड़ आ गया है. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और शिरोमणि अकाली दल के बीच एक बार फिर पुराने रिश्ते बहाल करने को लेकर सहमति बनती दिख रही है. उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो दोनों दल साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरने जा रहे हैं और गठबंधन की रूपरेखा लगभग पूरी तरह तैयार हो चुकी है. संभावना जताई जा रही है कि दिवाली के बाद गुरु नानक जयंती के पावन पर्व के आसपास इसका औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा. इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम को और भी भव्य बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बठिंडा में एक विशाल रैली आयोजित करने की तैयारी चल रही है, जहां से इस गठबंधन की हुंकार भरी जाएगी.

बादल परिवार के गढ़ से पीएम मोदी करेंगे नए समीकरण का आगाज

गठबंधन की घोषणा के लिए बठिंडा शहर का चयन बेहद सोच-समझकर किया गया है. बठिंडा को पारंपरिक रूप से बादल परिवार का सबसे मजबूत राजनीतिक किला माना जाता रहा है. ऐसे में इस ऐतिहासिक स्थल से प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित जनसभा न केवल कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह भरेगी, बल्कि पूरे पंजाब के सियासी गलियारों में एक सीधा और कड़ा संदेश भी देगी. इसी मंच से बीजेपी और अकाली दल के शीर्ष नेतृत्व द्वारा दोबारा हाथ मिलाने का आधिकारिक ऐलान संभव है.

सीटों के बंटवारे का नया फॉर्मूला: 47-48 सीटों पर ताल ठोकेगी बीजेपी

पंजाब की कुल 117 विधानसभा सीटों पर इस बार समीकरण पूरी तरह बदले नजर आएंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बीजेपी इस बार पुराने ढर्रे को छोड़कर पंजाब में अपने बढ़ते जनाधार के आधार पर 47 से 48 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, जबकि बाकी बची सीटों पर शिरोमणि अकाली दल अपने प्रत्याशी उतारेगी. यह नया फॉर्मूला दिखाता है कि बीजेपी अब राज्य में बराबरी का दर्जा चाहती है, क्योंकि 2017 के चुनाव तक अकाली दल 94 और बीजेपी मात्र 23 सीटों पर चुनाव लड़ती आई थी.

अमित शाह के बयान और सुखबीर बादल के रुख से मिले थे स्पष्ट संकेत

दोनों पार्टियों के करीब आने की अटकलों को तब और बल मिला जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आगामी 2027 के चुनाव के बाद पंजाब में एनडीए (NDA) की सरकार बनने की बात जोर-शोर से कही थी. शाह के इस बयान के तुरंत बाद अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भी अपनी मंशा साफ कर दी थी. पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात के बाद सुखबीर बादल ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनकी पार्टी समान विचारधारा और विकास के एजेंडे पर साथ आने वाले दलों का स्वागत करती है. उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) को पंजाब का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए उनके साथ किसी भी तरह के समझौते से साफ इनकार किया था और अपने पिछले शासनकाल के अमन-चैन व विकास की याद दिलाई थी.

23 साल पुराना गठबंधन और कृषि कानूनों के दौर की तल्खी

अकाली दल और बीजेपी का साथ पंजाब की राजनीति में करीब ढाई दशक तक बेहद असरदार रहा है. दोनों ने सबसे पहले 1997 में साथ मिलकर सरकार बनाई थी, जिसके बाद 2007 और फिर 2012 में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर दोबारा सत्ता संभाली. हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में सितंबर 2020 में अकाली दल ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था और हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों को अलग-अलग लड़ने पर करारी हार का सामना करना पड़ा था, जिससे अब दोनों ही दल एक बार फिर साथ आने को मजबूर हुए हैं.

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