निर्भया के दोषियों की आखिरी चाल भी हुई बेकार, सवा घंटे की सुनवाई के बाद चारों दोषियों की फांसी पर लगाई मुहर

दिल्ली हाईकोर्ट ने विनय, अक्षय औऱ पवन की ट्रायल कोर्ट के डेथ वारंट पर रोक लगाने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया है। जस्टिस मनमोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने रात में करीब सवा घंटे की सुनवाई के बाद ये आदेश जारी किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आज आप एक ही दिन में तीन कोर्ट में पहुंचे हैं। आप ये नहीं कह सकते हैं कि कोर्ट के दरवाजे बंद हैं।

जस्टिस मनमोहन ने एपी सिंह से कहा कि ये कैसी याचिका है जिसमें न कोई लिस्ट आफ डेट है। न ही कोई संलग्नक है। क्या ऐसी याचिका दायर करने की आपको अनुमति है। तिहाड़ जेल की ओर से वकील राहुल मेहरा ने कहा कि हमें ये भी पता नहीं है कि याचिकाकर्ता कौन हैं।राहुल मेहरा ने कहा कि सभी दोषियों के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो चुके हैं। राहुल मेहरा ने कहा कि हाईकोर्ट ने जनवरी में आदेश दिया था कि डेथ वारंट रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएं। एपी सिंह ने कहा कि एक याचिका राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पास और एक दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। इसके अलावा बिहार में एक केस लंबित है और एक केस निर्वाचन आयोग के खिलाफ हाईकोर्ट में लंबित है।

जस्टिस मनमोहन ने कहा कि इनकी कोई प्रासंगिकता नहीं है। हम फैसले की समीक्षा करने नहीं बैठे हैं। हम ये भी नहीं कह सकते कि डेथ वारंट पर रोक लगे। कोर्ट ने कहा कि अब यह मामला पूर्ण हो चुका है। राहुल मेहरा ने कहा कि चारो दोषियों ने गैंगरेप के पहले एक व्यक्ति से चोरी भी की थी जिसकी एफआईआर लंबित है। लेकिन यह केस उससे काफी ज्यादा गंभीर है। ए पी सिंह ने कहा कि मीडिया के दबाव की वजह से फांसी हुई है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही ये कह दिया है कि अब अक्षय की पत्नी की तलाक की याचिका की कोई प्रासंगिकता नहीं है। एपी सिंह ने कहा कि पवन का कोई भी पूर्व आपराधिक रिकार्ड नहीं रहा है। यह न्याय नहीं होगा। एपी सिंह ने कहा कि निर्वाचन आयोग, बिहार में लंबित केस और मानवाधिकार आयोग के समक्ष लंबित केस प्रासंगिक कैसे नहीं है। कोर्ट ने एपी सिंह से कहा कि समय बेहद कम है। आपके मुवक्किल को जल्द ही फांसी होने वाली है इस समय किताब को दस्तावेज के रूप में रेफर न करें।

कोर्ट ने कहा कि वो घर पर बैठकर लंबा आर्टिकल लिख सकते हैं लेकिन जरूरी नहीं की वो सच हो। आप एक किताब को ऐसे पढ़ कर बता रहे हैं जैसे वो सब सच हो। कोर्ट ने सिंह को कहा कि आप समझिए आपके पास समय कम है। केवल कुछ समय दूर है आपके मुवक्किल गॉड से मिलने में। ए पी सिंह ने कोरोना का मामला उठाया और कहा कि वो ना उम्मीद हो चुके है उनके पास कोई सुविधा नहीं है।ए पी सिंह ने कहा कि उन्हें एक या दो दिन का वक्त दिया जाए।

तब कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि हम आपको सिस्टम से खेलने नहीं दे सकते हैं।कोर्ट ने एपी सिंह को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने ढाई साल क्या किया? आपने राष्ट्रपति के समक्ष भी याचिका दाखिल नहीं की। कोर्ट ने कहा कि कानून उन लोगों का पक्षधर है जो समय पर कार्रवाई करते हैं। कोई सिस्टम के साथ खेल रहा है। आपकी ओर से देरी हो रही है। आप हमें दोषी ठहरा रहे हैं, दोष आप पर है।कोर्ट ने कहा कि हम उन मुद्दों पर अब कुछ नही सुनेंगे जो सुप्रीम कोर्ट पहले ही तय कर चुका है। कोर्ट ने एपी सिंह से कहा कि आप जो बहस कर रहे है वो आपकी याचिका में नहीं है। कोर्ट ने कहा कि तीन कोर्ट ने आपकी सजा को बरकरार रखा। राष्ट्रपति ने भी रखा ये चौथा डेथ वारंट है और आप इस तरह इतने गैरजिम्मेदाराना बहस कर रहे हैं। राहुल मेहरा ने कहा कि चार जिंदगियों का सवाल है। दूसरे पक्ष को गंभीरता दिखानी चाहिए इस तरह नहीं चल सकता है।

पटियाला हाउस कोर्ट ने आज ही.20 मार्च के डेथ वारंट पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दिया था। सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया था कि पवन की क्यूरेटिव याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया था कि पवन ने दूसरी दया याचिका दाखिल की थी लेकिन राष्ट्रपति ने उस पर विचार करने से मना कर दिया क्योंकि पहली दया याचिका सम्पूर्ण थी। ए पी सिंह ने पटियाला हाउस कोर्ट को इस बात की जानकारी दी और कहा कि अक्षय की दया याचिका राज्यपाल के पास लंबित है। पिछले 18 मार्च को तीनों दोषियों की ओर से वकील एपी सिंह ने जब इस याचिका पर सुनवाई की मांग की थी तो एडिशनल सेशंस जज धर्मेंद्र राणा ने एपी सिंह से पूछा था कि आप अंतिम समय में ही क्यों आते हैं। कोर्ट ने पूछा कि कुछ और लंबित है क्या। तब एपी सिंह ने कहा था कि हां क्युरेटिव याचिका लंबित है। तब कोर्ट ने पूछा था कि क्या दया याचिका खारिज करने को चुनौती दी गई है। तब वकील एपी सिंह ने कहा कि अक्षय और पवन की दूसरी दया याचिका लंबित है।

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