
लखनऊ। कोरोना का संक्रमण जहां और तेजी से बढ़ता जा रहा है। वहीं ऐसे में चिकित्सक लोगों को पहले से ज्यादा सचेत रहने की सलाह दे रहे हैं। खासतौर से कोरोना से बचाव के लिए अन्य बीमारियों को लेकर भी सर्तकता बेहद जरूरी है।
इसमें एलर्जी को नियंत्रित रखने के लिए विशेष ध्यान देना चाहिए। राजधानी के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष व इंडियन कालेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा व एप्लाइड इम्यूनोलाजी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि विभिन्न प्रकार की एलर्जी जैसे-नाक, अस्थमा, त्वचा, आंख और फूड एलर्जी कई बार बड़ी समस्या की वजह बन सकती है। इसे लेकर कोविड-19 से पहले और बाद की स्थितियों में किये जाने वाले बचाव व इलाज के तरीके लोगों को जानना समझना और उस पर अमल करना बेहद जरूरी है। इसके बाद ही कोरोना और अन्य प्रकार की समस्या का अंतर समझा जा सकता है।
डॉ. सूर्यकान्त के मुताबिक भारतीय उप महाद्वीप में 10 करोड़ नाक की एलर्जी (एलर्जी राह्नाइटिस) के मरीज मौजूद हैं। एलर्जिक राह्नाइटिस, फ्लू एवं कोविड-19 के लक्षणों में अंतर बताते हुए डॉ. सूर्यकान्त कहते हैं कि एलर्जिक राह्नाइटिस में मरीज को छींक आना, आंखों का लाल होना, नाक बहना, फ्लू में मरीज को ठण्ड के साथ बुखार आना, नाक बहना, सिर दर्द और कोरोना के मरीजों में बुखार, सूखी खांसी एवं सांस का फूलना जैसे प्रमुख लक्षण पाए जाते हैं। वह कहते हैं कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती वैसे ही हर टपकती नाक कोरोना नहीं होती। डॉ. सूर्यकान्त के मुताबिक एलर्जिक राह्नाइटिस, अस्थमा, त्वचा, आंख एवं फूड एलर्जी के जिन मरीजों ने उचित दवाओं से अपनी एलर्जी के लक्षणों को पूरी तरह से नियंत्रण में कर रखा है, उनको कोविड का अतिरिक्त जोखिम नहीं है। दूसरी ओर जिन मरीजों के एलर्जी के लक्षण नियंत्रण में नहीं है या साथ में कोई अन्य बीमारी जैसे क्रोनिक किडनी डिजीज, डायबिटीज, क्रोनिक लीवर डिजीज, हाइपरटेंशन जैसी बीमारी वाले मरीजों में कोरोना होने का ज्यादा जोखिम है।
उन्होंने सुझाव दिया कि माइल्ड टू माडरेट एलर्जी मरीजों को टेली मेडिसिन या टेली पैथी के जरिये उपचार किया जाए और उन्होंने एलर्जी व अस्थमा के गंभीर रोगियों को क्लीनिक व अस्पताल में देखते समय बचाव के विभिन्न तरीके जैसे-मरीज का थर्मल स्क्रीनिंग, एप्वाइंटमेंट के बाद देखना और ऐरोसेल जेनरेटिंग प्रोसीजर जैसे पीएफटी (पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट), नेबुलाइजेशन आदि से बचने पर जोर दिया।
डॉ. सूर्यकान्त इन्हेलर एवं स्पेसर को नेबुलाइजेशन की जगह पर उपयोग करने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक नेबुलैलाइजेशन की अतिआवश्यकता पर इसका प्रयोग खुले स्थान जैसे-पोर्च, गैराज या एक अलग हवादार कमरे में करें। एलर्जी टेस्टिंग और नए मरीजों में बाइलाजिकल एजेंट जैसे ओमेलीजुमाब को देने से उन्होंने साफ मना किया । डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि नेबुलाइजर एवं स्पेसर को हर बार उपयोग करने के बाद पानी व साबुन या लिक्विड डिटर्जेंट से साफ करें जिससे कोविड संक्रमण से बचाव किया जा सके। उन्होंने डिजिटल इन्हेलर, स्मार्ट थर्मामीटर एवं स्मार्ट स्पाइरोमीटर का प्रयोग करने की सलाह दी। शारीरिक इम्यूनिटी बढाने के लिए उचित भोजन, अच्छी नींद, भाप लेना, धूम्रपान से बचाव एवं नियमित रूप से योग व प्राणायाम करने की सलाह दी। इसके साथ ही डॉ. सूर्यकान्त कोरोना से बचाव के लिए शारीरिक दूरी, एलर्जी से बचाव, फेस मास्क का प्रयोग, बार-बार हाथों को साबुन से 30 सेकेण्ड तक धुलना और बार-बार नाक, कान, आंख व मुंह को न छूने की हिदायत देते हैं।













