लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ ‘राजा भैया’ और उनकी पत्नी भानवी कुमारी सिंह के बीच की कानूनी व पारिवारिक जंग अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले चुकी है। भानवी सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके बच्चों को आर्म्स एक्ट के झूठे मामले में फंसाने की साजिश रची जा रही है। सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट शेयर करते हुए भानवी सिंह ने लखनऊ की हजरतगंज पुलिस और प्रतापगढ़ प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे यूपी के प्रशासनिक और राजनीतिक महकमे में खलबली मच गई है।
लखनऊ हजरतगंज पुलिस पर गंभीर आरोप, डीसीपी को भी नहीं थी FIR की भनक!
भानवी कुमारी सिंह भद्री का दावा है कि साल 2024 में लखनऊ के हजरतगंज थाने में तत्कालीन एसएचओ के कार्यकाल के दौरान उनके खिलाफ दो फर्जी एफआईआर दर्ज की गईं। इस कानूनी पचड़े में उनके निर्दोष बच्चों को भी घसीट लिया गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि भानवी सिंह को इन एफआईआर की जानकारी खुद पुलिस से नहीं बल्कि मीडिया के जरिए मिली। जब उन्होंने इस बाबत डीसीपी रवीना त्यागी से संपर्क किया, तो उन्होंने ऐसी किसी एफआईआर की जानकारी होने से ही साफ इनकार कर दिया। भानवी सिंह ने सवाल उठाया है कि आखिर थाने के एसएचओ के स्तर पर दर्ज इतनी बड़ी एफआईआर की भनक उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं लगी और जांच अधिकारियों ने उनके नाम से फर्जी बयान तक कैसे दर्ज कर दिए?
2023 से हथियारों की बरामदगी की गुहार, मिला उल्टा आर्म्स एक्ट का नोटिस
मामला केवल एफआईआर तक ही सीमित नहीं है, अब प्रतापगढ़ पुलिस ने भी भानवी सिंह को आर्म्स एक्ट के तहत नोटिस थमा दिया है। इस पर भानवी सिंह का कहना है कि वे साल 2023 से ही पुलिस प्रशासन से लिखित शिकायतें कर रही हैं कि उनके नाम पर पंजीकृत लाइसेंसशुदा हथियार उनके पास नहीं हैं, बल्कि उनके पति (राजा भैया) के कब्जे में हैं। उन्होंने प्रशासन से उन हथियारों को बरामद करने की गुहार लगाई थी। लेकिन हथियारों को जब्त करने की बजाय उल्टा उन्हें ही आर्म्स एक्ट का नोटिस भेज दिया गया। भानवी सिंह ने स्पष्ट किया कि वह एक साधारण गृहिणी हैं और उनका किसी भी प्रकार के अवैध हथियार, गोला-बारूद या आपराधिक गतिविधि से कोई वास्ता नहीं है।
‘वोटर लिस्ट से कटवा दिया था नाम’, मानसिक उत्पीड़न और प्रतिशोध का लगाया आरोप
अपनी व्यथा सुनाते हुए भानवी सिंह ने बताया कि सत्ता और प्रभाव के दबाव में उनका और उनकी दोनों बेटियों का नाम वोटर लिस्ट (SIR) से भी कटवा दिया गया था। हालांकि, बाद में शिकायत दर्ज कराने पर बीएलओ ने दबाव की बात स्वीकार की और नाम वापस जोड़े गए। भानवी सिंह ने सवाल किया कि आखिर यूपी, दिल्ली और नैनीताल पुलिस की हर कार्रवाई उनके खिलाफ ही क्यों मुड़ जाती है? वे लगातार मानसिक उत्पीड़न और प्रतिशोध की भावना से की जा रही कार्रवाइयों का सामना कर रही हैं।
राष्ट्रपति, पीएमओ और सीएम योगी से लगाई न्याय की गुहार
खुद को लाचार और प्रताड़ित बताते हुए भानवी कुमारी सिंह ने उत्तर प्रदेश पुलिस, डीजीपी, मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO UP), मुख्य सचिव, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रपति भवन और गृह मंत्रालय को टैग करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल किया है कि क्या एक आम गृहिणी को अपनी सुरक्षा और न्याय मांगने की इतनी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी? अब देखना यह होगा कि इस हाई-प्रोफाइल मामले में शासन और प्रशासन स्तर से क्या कदम उठाया जाता है।


















