तमिलनाडु चुनाव में AI का जलवा: कुंभकोणम में ‘होलोग्राम’ के जरिए पहुंचे विजय, मतदाताओं में दिखा भारी क्रेज

कुंभकोणम/चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की जंग अब जमीन के साथ-साथ ‘वर्चुअल’ दुनिया में भी लड़ी जा रही है। तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के अध्यक्ष और सुपरस्टार विजय की कमी को पूरा करने के लिए कुंभकोणम के एक उम्मीदवार ने ऐसी तकनीक का सहारा लिया है, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में हो रही है। विजय की रैलियों में भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन व्यस्तता के कारण वे हर जगह नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसे में एआई (AI) और होलोग्राफिक तकनीक के जरिए उन्हें सीधे जनता के बीच उतारा गया है।

50,000 रुपये रोजाना किराए पर ‘एआई विजय’

कुंभकोणम से टीवीके उम्मीदवार, 32 वर्षीय विनोद रवि ने अपनी चुनावी रैलियों में होलोग्राफिक एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू किया है। रवि ने यह सिस्टम ‘कामा टेक्नोलॉजीज’ से लिया है, जिसका किराया 50,000 रुपये प्रतिदिन है। निर्वाचन आयोग ने उन्हें फिलहाल चार दिनों तक इस तकनीक के उपयोग की अनुमति दी है। विनोद रवि का कहना है कि यह तकनीक उन्हें वैसा ही आत्मविश्वास दे रही है जैसे विजय (थलापति) उनके बगल में खड़े हों।

कैसे काम करता है यह ‘जादुई’ चुनावी वाहन?

चुनावी वाहन पर लगा यह सिस्टम विज्ञान और तकनीक का एक अनूठा संगम है:

  • प्रोजेक्शन फैन डिस्प्ले: वाहन पर लगे तेज रफ्तार मोटरों और विशेष पंखों के जरिए विजय की सिर से लेकर पैर तक की 3डी (3D) इमेज हवा में तैरती हुई दिखाई देती है।

  • ऑडियो सिंक्रोनाइजेशन: यह सिस्टम विजय के पुराने भाषणों के साथ सिंक्रोनाइज्ड है। ऑडियो और 3डी विजुअल का तालमेल इतना सटीक है कि मतदाताओं को लगता है कि विजय खुद वाहन की छत पर खड़े होकर उन्हें संबोधित कर रहे हैं।

  • विजुअल इंपैक्ट: यह तकनीक ‘दृष्टि की निरंतरता’ (Persistence of Vision) के सिद्धांत पर आधारित है, जिससे छवि बिल्कुल जीवंत और वास्तविक लगती है।

वर्चुअल मौजूदगी, असली उत्साह

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान से पहले उम्मीदवार मतदाताओं के साथ जुड़ाव बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। विनोद रवि के अनुसार, जब विजय की होलोग्राफिक छवि वाहन पर उभरती है, तो समर्थकों का जोश सातवें आसमान पर पहुंच जाता है। यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रही है जहां विजय व्यक्तिगत रूप से प्रचार के लिए नहीं पहुंच पाए हैं।

एआई का यह प्रयोग न केवल चुनाव प्रचार को आधुनिक बना रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि आने वाले समय में तकनीक भारतीय राजनीति की दिशा और दशा कैसे बदल सकती है।

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