फतेहपुर में गोवंश के नाम पर षणयंत्र, डीएम की छवि बिगाड़ने की कोशिश, जानें पूरा मामला

डीएम की गाय बताकर जारी कर दिया आदेश

आदेश में सात डॉक्टरों की ड्यूटी लगाने का पत्र हुआ वायरल

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पर कार्रवाई की लटकी थी तलवार, कर दिया अजीबोगरीब पत्र वायरल

भास्कर ब्यूरो

फतेहपुर। जनपद में गाय और गोवंश पर गहमागहमी शुरू हो गई है। सोशल मीडिया में डीएम का आदेश बताकर एक पत्र वायरल किया गया है जिसमे मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉक्टर एस के तिवारी का हस्ताक्षर है। पत्र में डीएम की गाय को देखने के लिए सात डॉक्टरों की ड्यूटी प्रतिदिन के हिसाब से लगाई गई है। पत्र में लिखा गया कि जिलाधिकारी महोदय की गाय की चिकित्सा करने हेतु 7 डॉक्टरों की प्रतिदिन सुबह-शाम ड्यूटी लगाई जाती है और साथ में डॉक्टर दिनेश कुमार अतिरिक्त पशु चिकित्सा अधिकारी सनगांव से समन्वय स्थापित कर प्रतिदिन सुबह-शाम देखने की सूचना मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शाम 6:00 बजे दूरभाष के माध्यम से अवगत कराएंगे।

नोट के रूप में लिखा गया कि किसी भी पशु चिकित्सा अधिकारी की अनुपस्थिति में उस दिन का कार्य डॉ सुरेश कुमार कनौजिया पशु चिकित्सा अधिकारी देखेंगे जिसमे शिथिलता अक्षम्य होगी।  ऐसा पत्र 9 जून को पत्रांक संख्या 544 मुख्य पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय से जारी हुआ बाद में 10 को सुबह इस पत्र को 545 पत्रांक में निरस्त कर दिया गया। इस पत्र में डीएम की गाय को देखने के लिए सात डॉक्टरों की टीम लगाने को लेकर बवाल मच गया। सोशल मीडिया सहित कई मीडिया संस्थानों ने पीछे की वजह जाने बगैर पत्र के आधार पत्र डीएम का कारनामा, पद का दुरुपयोग आदि गम्भीर आरोप लगाकर एक महिला अधिकारी पर टिपण्णी करनी शुरू कर दी। डीएम अपूर्वा दुबे ने पत्र वायरल होने के बाद स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि जिले की गौशालाओं में लगातार गोवंशो की हालत इलाज के अभाव में बिगड़ रही थी।

कई डॉक्टर पेशे के प्रति ईमानदार हैं मगर कई डॉक्टर ऐसे हैं जो गौशालाओं में जाते ही नहीं। जिन पर ड्यूटी के लिए सख्ती बरती गई थी जबकि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी की भूमिका कई मामलों में संदिग्ध पाई गई थी जिनकी जांच कराई गई थी। जिसमे एक जांच पूर्व में आईएएस निधि बंसल ने की थी जबकि एक जांच परियोजना निदेशक ने की थी। आईएएस निधि बंसल द्वारा भेवली गौशाला की जांच में व 3 जून को परियोजना निदेशक की जांच में पशु चिकित्साधिकारी की भूमिका संदिग्ध मिली। जिसमे लापरवाही बरतने व संलिप्तता के मामले में मुख्य चिकित्साधिकारी पर कार्रवाई की तलवार लटकी थी। डीएम ने यह भी बताया कि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने कई डॉक्टरों को जहां जरूरत कम डॉक्टरों की है वहां मनमाफिक ढंग से सम्बद्ध कर रखा था जबकि जिन गौशालाओं में अधिक गाये हैं जहां ज्यादा जरूरत है वहां सिर्फ एक की तैनाती की गई है। जिनके खिलाफ कार्रवाई की प्रकिया प्रगति पर थी। ऐसे में पशु चिकित्साधिकारी ने साजिश रचकर ऐसा पत्र वायरल किया जिससे डीएम की निजी छवि को धूमिल किया जा सके।


नही है कोई निजी गाय, डेढ़ वर्ष के कार्यकाल को सभी ने देखा

डीएम अपूर्वा दुबे ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पास व उनके परिवार की कोई निजी गाय नही है। मुख्य चिकित्साधिकारी ने षणयंत्र के तहत पत्र वायरल करने के उद्देश्य से ही बनाया था फिर उसके बाद निरस्त कर दिया। ऐसे में इस षणयंत्र की जांच कराई जा रही है। उनके द्वारा मुख्य पशुचिकित्साधिकारी आरडी अहिरवार व अपर मुख्य चिकित्साधिकारी/प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर एस के तिवारी को अन्यत्र जिले में तबादला करने सहित निलंबित करने के लिए अपर मुख्य सचिव पशुधन विभाग को पत्र लिखा गया है। उन्होंने बताया डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में ऐसा अजीबोगरीब आदेश उनके द्वारा कभी न ही कभी मौखिक दिया गया और न ही लिखित। डेढ़ वर्ष के अंदर बेहतर काम करने व अधीनस्थों से करवाने का प्रयास हुआ है जिससे लगभग सभी क्षेत्र में परिवर्तन नजर भी आ रहा है।

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