
भीलवाड़ा : राजस्थान के सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय गंभीर सवालों के घेरे में है। प्रदेश में प्रसव के बाद महिलाओं की लगातार हो रही मौतें मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की चिंताजनक स्थिति को बयां कर रही हैं। कोटा, बीकानेर और जोधपुर के संभाग स्तरीय बड़े अस्पतालों के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा के सरकारी चिकित्सालयों से दिल दहला देने वाले मामले सामने आए हैं, जिसने पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में पिछले छह दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इन सभी महिलाओं का सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था, जिसके बाद तबीयत बिगड़ने पर इन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया था। इसी बीच अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर की कल्चर जांच रिपोर्ट में संक्रमण (Infection) मिलने की पुष्टि के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है।
हालांकि मौतों से इसके सीधे संबंध की जांच अभी जारी है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अस्पताल में प्रतिदिन होने वाले 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशनों के मुकाबले सीमित सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं और वहां अलग आईसीयू तथा पोस्ट-ऑपरेटिव सुविधाओं की कमी है। अकेले भीलवाड़ा में मार्च से जुलाई के बीच अब तक 9 प्रसूताएं अपनी जान गंवा चुकी हैं।
भीलवाड़ा के साथ ही बांसवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में भी शुक्रवार को दो घंटे के भीतर दो प्रसूताओं ने दम तोड़ दिया। प्रसव के 24 घंटे के भीतर जान गंवाने वाली इन दोनों महिलाओं ने पहली बार बच्चों को जन्म दिया था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार इनमें से एक महिला गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी और दूसरी महिला की मौत का कारण उच्च रक्तचाप माना जा रहा है, हालांकि दोनों नवजात शिशु सुरक्षित हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने मामले की विस्तृत जांच के लिए पांच सदस्यीय चिकित्सकीय समिति का गठन किया है।
इन घटनाओं को लेकर प्रदेश में सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग और डॉक्टरों का तर्क है कि अधिकांश मरीज पहले से ही गंभीर अवस्था में रेफर होकर आते हैं। चिकित्सकों के अनुसार पल्मोनरी एंबोलिज्म, गंभीर एनीमिया और प्रेग्नेंसी इंड्यूस्ड हाइपरटेंशन जैसी जटिलताएं इन मौतों की मुख्य वजह बनती हैं। फिलहाल, प्रशासन ने हर मामले की चिकित्सकीय जांच कराने और लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।












