
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी गिरावट के बावजूद भारतीय तेल कंपनियों ने आज, 27 जून के लिए घरेलू पेट्रोल और डीजल की दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। देशभर में ईंधन के दाम पिछले एक महीने से पूरी तरह स्थिर बने हुए हैं। आखिरी बार 25 मई को देश में पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में पेट्रोल पहली बार 100 रुपये के पार निकल गया था।
अगर आप आज अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने का मन बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले जान लीजिए कि आपके शहर में तेल किस भाव पर बिक रहा है।
आज 27 जून को प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल के भाव (प्रति लीटर):
सरकारी तेल कंपनियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के महानगरों और प्रमुख शहरों में कीमतें इस प्रकार हैं:
-
दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.20
-
मुंबई: पेट्रोल ₹111.21 और डीजल ₹97.83
-
चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55
-
कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51 और डीजल ₹99.82
-
नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹97.56
-
लखनऊ: पेट्रोल ₹101.89 और डीजल ₹95.36
-
चंडीगढ़: पेट्रोल ₹101.51 और डीजल ₹89.47
-
पटना: पेट्रोल ₹113.37 और डीजल ₹99.36
क्रूड ऑयल 10% से ज्यादा टूटा, ब्रेंट क्रूड $72 के करीब
वैश्विक मोर्चे पर एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव कम होने और 60 दिनों के सीजफायर (संघर्ष-विराम) पर सहमति बनने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई है। सप्लाई को लेकर बनी चिंताएं खत्म होने के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब 3.84% गिरकर 72.60 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) 3.74% की गिरावट के साथ 69.23 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। अगर पूरे हफ्ते की बात करें, तो ब्रेंट क्रूड में लगभग 10.86% और डब्ल्यूटीआई में 9.62% की भारी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
कच्चा तेल रिकॉर्ड सस्ता, फिर आम जनता को क्यों नहीं मिल रही राहत?
ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल इतना सस्ता होने के बाद भी भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम न घटने के पीछे मुख्य रूप से तेल कंपनियों का प्राइसिंग मैकेनिज्म काम करता है:
-
15 दिनों का औसत कैलकुलेशन: भारत में सरकारी तेल कंपनियां रोजाना के उतार-चढ़ाव के आधार पर तुरंत रेट नहीं बदलतीं। वे पिछले 15 दिनों या एक महीने की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों का आकलन करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेती हैं।
-
डीजल पर मामूली अंडर-रिकवरी: बाजार जानकारों का मानना है कि वर्तमान में तेल कंपनियां पेट्रोल की बिक्री पर तो अच्छा मार्जिन (कमाई) निकाल रही हैं, लेकिन पूर्व में हुए घाटे के कारण डीजल पर उन्हें अभी भी मामूली नुकसान उठाना पड़ रहा है। यही वजह है कि कंपनियां अभी ‘वेट एंड वॉच’ (ठहरो और देखो) की नीति अपना रही हैं।
क्या आने वाले दिनों में घटेंगे तेल के भाव?
भारत अपनी कुल जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंदी का बने रहना देश के आयात बिल (Import Bill) को भारी रूप से कम करेगा। तेल सस्ता होने से न केवल रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूती मिलेगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग, एफएमसीजी (FMCG), लॉजिस्टिक्स और पेंट जैसे भारी भरकम सेक्टरों की इनपुट कॉस्ट काफी घट जाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय तक इसी तरह 72-74 डॉलर के दायरे में टिकी रहीं, तो तेल कंपनियां जल्द ही आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती कर एक बड़ा तोहफा दे सकती हैं।













