
नई दिल्ली। नेपाल में बुधवार सुबह तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी। बाढ़ और लैंडस्लाइड से अब तक 8 जिलों में 162 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 750 से अधिक लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें बड़ी संख्या में भारतीय और अन्य देशों के नागरिक शामिल हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी के आसपास बाढ़ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। यहां कई घर, सड़कें और पुल बाढ़ के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हो गए। बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
8 जिलों में मिले 162 शव
नेपाल पुलिस के बुलेटिन के अनुसार, गुरुवार सुबह 5 बजे तक देश के 8 जिलों से 162 शव बरामद किए जा चुके थे। बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान तेजी से चलाया जा रहा है।
नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अनुसार, लापता विदेशी पर्यटकों में भारत के 100 से अधिक, अमेरिका के 54, ऑस्ट्रेलिया के 34 और इंग्लैंड के 33 नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा नेपाल के भी 100 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
यह इलाका तीर्थयात्रियों, ट्रेकर्स और विदेशी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। ऐसे में अधिकारियों को आशंका है कि लापता लोगों की संख्या और बढ़ सकती है।
तिब्बत में भी भारी तबाही
बाढ़ का असर नेपाल के साथ-साथ तिब्बत में भी देखने को मिला है। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, तिब्बत में कम से कम 3 लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता बताए गए हैं।
तिब्बत से सामने आए कई सीसीटीवी फुटेज में पानी और कीचड़ का तेज बहाव सीमा पर बनी इमारतों से टकराता दिखाई दे रहा है। अचानक आए पानी ने सीमा क्षेत्र में मौजूद कई संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया।
नेपाल में दर्जनों पुलिसकर्मियों और सेना के जवानों के भी लापता होने की खबर है। बिजली विभाग के कई कर्मचारी भी प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
घर, सड़क और पुल सब हुए तबाह
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई बाढ़ और लैंडस्लाइड से कई गांवों में भारी नुकसान हुआ है। हवाई तस्वीरों में रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी के किनारे स्थित घरों, सड़कों और पुलों को बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त देखा गया है।
आपदा के 24 घंटे बाद भी कई इलाकों में स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण राहत एजेंसियों को प्रभावित लोगों तक पहुंचने और लापता लोगों की जानकारी जुटाने में परेशानी हो रही है।
भूकंप नहीं, लैंडस्लाइड से पैदा हुई ऊर्जा?
बाढ़ के शुरुआती घंटों में नेपाली अधिकारियों को आशंका थी कि आपदा से पहले भूकंप आया होगा। हालांकि, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, जिस ऊर्जा को शुरुआत में भूकंप जैसा माना गया, वह वास्तव में लैंडस्लाइड की वजह से पैदा हुई हो सकती है।
नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था और करीब तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ की सूचना मिली। इस वजह से आशंका जताई गई कि भूकंप के झटकों से हिमनद या अन्य प्राकृतिक अवरोध टूटने के कारण बाढ़ आई होगी। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों को लेकर वैज्ञानिक और अधिकारी अभी जांच कर रहे हैं।
200 किलोमीटर तक फैला बाढ़ का असर
अधिकारियों के मुताबिक, तिब्बत से लगे नेपाल के रसुवा और धादिंग जिलों में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानों के खिसकने के बाद तिमुरे इलाके में भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई।
इसके बाद पानी त्रिशूली नदी में पहुंचा और कई अन्य इलाकों को प्रभावित करता हुआ नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहूं और नवलपरासी पूर्व तक फैल गया। बाढ़ का असर काठमांडू से करीब 70 से 200 किलोमीटर तक के इलाकों में देखा गया।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारतीय भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय तीर्थयात्रियों के भी लापता होने की खबर है। अधिकारियों के मुताबिक, लापता भारतीयों में कम से कम 133 भारतीय नागरिक और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। वहीं कम से कम 50 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है।
सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल्स के अनुसार, प्रभावित भारतीयों में कम से कम 59 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री थे। संचार व्यवस्था ठप होने के कारण प्रभावित भारतीयों की स्थिति के बारे में अभी सीमित जानकारी ही मिल पाई है।
ईशा फाउंडेशन ने भी बताया कि उसके 77 सदस्य एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे और उनके बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पा रही है।
कई राज्यों के पर्यटक भी लापता
तमिलनाडु के 57 पर्यटकों में से 37 का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 लोगों के बारे में जानकारी मिल चुकी है। बताया जा रहा है कि ये पर्यटक हिमालय क्षेत्र स्थित एक मंदिर की यात्रा पर थे।
पश्चिम बंगाल के भी कई लोगों के लापता होने की खबर है। इनमें कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यों का एक समूह भी शामिल बताया जा रहा है।
भारत ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से फोन पर बातचीत की और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की पहली खेप भी भेजी है।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। भारतीय नागरिक +977 985 131 6807 और +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं।
भारतीय दूतावास ने कहा है कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के जल्द से जल्द बचाव और राहत के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के लगातार संपर्क में है।
तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों ने भी प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के लिए हेल्पलाइन शुरू की हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी सहायता के लिए टोल-फ्री इमरजेंसी नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। वहीं बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने 0086 185 1428 4905 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है।
8 ट्रकों में भेजी गई 8 टन राहत सामग्री
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के कार्यालय के मुताबिक, रसुवा क्षेत्र में भोटेकोशी नदी की बाढ़ से प्रभावित इलाकों के लिए करीब 8 टन राहत सामग्री भेजी गई है। यह सामग्री बुधवार शाम नेपाल सेना के 8 ट्रकों के जरिए भेजी गई।
राहत सामग्री में 500 मच्छरदानी, 500 कंबल, 500 सोलर लाइट, 500 सोलर पैनल और 220 स्लीपिंग बैग समेत जरूरी सामान शामिल हैं।
भारत के अलावा अमेरिका, चीन, यूरोपीय संघ और कई अन्य देशों ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजने या सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है।
नेपाली प्रधानमंत्री बोले- पूरा देश सदमे में
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने आपदा पर दुख जताते हुए कहा कि पूरा देश सदमे में है और बेहद दुखी है। कुछ जीवित बचे लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को बाढ़ के तेज बहाव में बहते हुए देखा।
राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। हालांकि, खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण बचाव कार्य में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और यूक्रेन के नागरिक भी प्रभावित
नेपाल की आपदा का असर कई अन्य देशों के नागरिकों पर भी पड़ा है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने पुष्टि की है कि लापता लोगों में 34 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक शामिल हैं।
न्यूजीलैंड के विदेश मामलों और व्यापार मंत्रालय ने बताया कि उसे प्रभावित क्षेत्र में मौजूद कुछ न्यूजीलैंड नागरिकों के बारे में जानकारी है और वह उनके परिवारों के संपर्क में है। हालांकि, मंत्रालय ने कहा कि अभी तक यह पुष्टि नहीं हुई है कि कितने न्यूजीलैंड नागरिक प्रभावित हुए हैं।
भारत में न्यूजीलैंड के हाई कमीशन ने नेपाल के अधिकारियों से तत्काल जानकारी हासिल करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ के बाद उसके 53 नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। मंत्रालय ने कहा कि अभी ऐसी कोई जानकारी नहीं है जिससे यह पुष्टि हो कि इन नागरिकों में से किसी की मौत हुई है या कोई घायल हुआ है। मंत्रालय को लापता लोगों के रिश्तेदारों से भी लगातार संदेश मिल रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन की भूमिका पर भी नजर
इस भीषण आपदा के बाद विशेषज्ञ घटना के पीछे की परिस्थितियों को समझने में जुटे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय के कुछ हिस्सों में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। हालांकि, इस घटना में ग्लेशियरों के पिघलने की कितनी भूमिका रही, इस बारे में अभी कोई पुख्ता निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों का मुख्य ध्यान लापता लोगों का पता लगाने, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और दूरदराज के इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने पर है। जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।














