साहब! हम अंगूठा छाप है, लेखपाल ने हाथ पकड़ कर कराये थे हस्ताक्षर

  • पीडि़त किसानों ने जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट को दिए बयान
  • हो सकती है आरोपी लेखपाल पर बड़ी कार्रवाई

सीतापुर। साहब! हम अंगूठा छाप है। खेत की जब लिखा पढ़ी की थी तब हमने अंगूठा लगाया था मगर जब पैसा के लिए खाता खुलवाया गया तो लेखपाल अविनाश रस्तोगी ने खुद नीचे कलम पकड़ा और मुझे ऊपर पकड़ाकर हस्ताक्षर बनवाए। हम यह जान ही नहीं पाए कि यह स बवह क्यों कर रहे है। जब हमने पूछा तो बताया कि जमीन के लिए हस्ताक्षर अनिवार्य है इसलिए करो। उसके बाद हमारे खातों से पैसा निकाला गया।

यह कहना था उन किसान पीडि़तों रामाधार व लालजी का जिनके खेत की लिखापढ़ी में गडबड़ी होने के बाद खाता में आए पैसा में भी गड़बड़ी की गई। गौरतलब है कि गोलोक कोडर के मजरा पासिनपुरवा निवासी रामाधार व लालजी की खरीदी गई जमीन घोटाला मामले में आज गवाही थी। जिसमें लालजी व रामाधार के बयान नामित जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट हर्षदेव पांडेय ने लिए। उनका कहना था खेती को लेेकर जो भी उनसे कहा गया था उसके अनुरूप कार्य नहीं हुआ। सब लेखपाल अविनाश रस्तोगी का किया धरा है।

उन्होंने कभी भी तहसीलदार नीरज पटेल को देखा ही नहीं और न ही उनसे मिले है। मेरे साथ जब भी बैंक जाते थे तो लेखपाल ही जाते थे। जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों किसानों तथा गवाह प्रहलाद के बयान नोट करते हुए उन्हें न्याय दिलाए जाने का पूरा भरोसा दिलाया। वहीं पीडि़त किसानों के बयान से जाहिर होता है कि आरोपी लेखपाल पर प्रशासन बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

…तो बयान में बच सकते हैं तहसीलदार
पीडि़त किसानों लालजी व रामाधार तथा प्रहलाद द्वारा दिए गए बयान कि वह कभी तहसीलदार से मिले ही नहीं और न ही उन्हें देखा से तहसीलदार नीरज पटेल पूरी तरह से बच सकते है। क्योंकि शुरू से लेेकर अभी तक तहसीलदार नीरज पटेल का ही नाम आ रहा था। मगर जिस तरह से आज किसानों ने सभी के सामने कहा कि उन्होंने तहसीलदार को न तो देखा है और न ही मिले है। जो भी काम कराया है वह लेखपाल ने ही किया है। उनके इस बयान से तहसीलदार को पूरी तरह से राहत मिल सकती है।

क्या कहते हैं लेखपाल अविनाश रस्तोगी
जांच अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट के कार्यालय के बाहर खड़े लेखपाल से जब बयान लिए गए तो उसने सारा ठीकरा तहसीलदार पर ही फोड़ डाला। उसका कहना था कि जिस काम के लिए तहसीलदार कहते थे वह कराने के लिए जाता था। अब तो तहसीलदार न तो उससे बात ही करते है और न ही फोन रिसीव करते है।

बख्शा नहीं जाएगा कोई भी गुनहगार
जमीन घोटाला की प्रारंभिक जांच कर रहे सटी मजिस्ट्रेट हर्षदेव पांडेय ने बयान लेने के बाद बताया कि प्रथम दृष्टया प्रतीत होता है कि इन किसानों के साथ अन्याय हुआ है। कितना और किस प्रकार से हुआ है यह तो आगे की जांच के बाद ही पता चलेगा। मगर जो जो लोग इस कृत्य में शामिल है उन्हें ईश्वर भी नहीं माफ करेगा और न ही शासन व प्रशासन। सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

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