नई दिल्ली/झारखंड: आज के दौर में सोने की कीमतें रिकॉर्ड तोड़ रही हैं। 24 कैरेट गोल्ड का भाव ₹1.5 लाख के करीब पहुंच चुका है, जिससे आम आदमी के लिए जेवर बनवाना किसी हसीन सपने जैसा हो गया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस सोने को आप तिजोरियों में बंद देखते हैं, वह कुछ नदियों में पानी के साथ रेत में बहता है? जी हां, दुनिया भर में ऐसी कई रहस्यमयी नदियां हैं जहाँ की मिट्टी और पानी से सालों से सोना निकाला जा रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि दुनिया की इन चुनिंदा ‘सोने की नदियों’ में से 4 तो हमारे अपने देश भारत में ही मौजूद हैं। आइए जानते हैं इन कुदरती ‘खजानों’ के बारे में जहाँ आज भी लोग किस्मत आजमाने पहुँचते हैं।

कैलिफोर्निया की यूबा नदी: 1850 से उगल रही है सोना
अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित यूबा नदी (Yuba River) इतिहास के सबसे बड़े ‘गोल्ड रश’ की गवाह रही है। 1850 के दशक से ही यहाँ बड़े पैमाने पर माइनिंग हो रही है। यहाँ ‘प्लेसर गोल्ड’ के भंडार इतने समृद्ध हैं कि आज भी माइनर्स आधुनिक ड्रेजिंग मशीनों के जरिए नदी की तलहटी से सोना निकालते हैं। यह नदी आज भी गोल्ड प्रोडक्शन के मामले में दुनिया के नक्शे पर चमक रही है।
क्लोनडाइक: दुनिया की सबसे मशहूर ‘गोल्ड रिवर’
कनाडा की क्लोनडाइक नदी (Klondike River) को दुनिया की सबसे धनी सोने की नदी माना जाता है। 1896 में जब यहाँ पहली बार सोना मिला, तो पूरी दुनिया से हजारों लोग रातों-रात अमीर बनने की चाह में यहाँ खिंचे चले आए। माना जाता है कि इस नदी की तलहटी में सोने की परतें बिछी हुई हैं। यहाँ आज भी गोल्ड हंटिंग एक बड़ा आकर्षण है।
भारत की ‘स्वर्णरेखा’: जहाँ की रेत में छिपी है दौलत
भारत में सोने की नदियों का जिक्र हो और स्वर्णरेखा (Subarnarekha River) का नाम न आए, ऐसा मुमकिन नहीं। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से होकर बहने वाली इस नदी के नाम में ही ‘सोना’ बसा है। स्थानीय आदिवासी समुदाय सदियों से इस नदी की रेत को छानकर सोने के बारीक कण और फ्लैक्स (Flakes) इकट्ठा करते आ रहे हैं। भूवैज्ञानिकों ने भी यहाँ ‘प्लेसर गोल्ड’ होने की पुष्टि की है।
भारत में यहाँ भी बहता है ‘लिक्विड गोल्ड’
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करकरी नदी (झारखंड): यह स्वर्णरेखा की सहायक नदी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि स्वर्णरेखा में मिलने वाला सोना असल में इसी 37 किमी लंबी छोटी सी नदी के जरिए पहुँचता है।
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ब्रह्मपुत्र नदी (असम): असम की जीवनरेखा कही जाने वाली यह नदी हिमालय की चोटियों से अपने साथ सोने के बारीक कण बहाकर लाती है। यहाँ के लोग ‘पैनिंग’ तकनीक से सोना निकालकर अपनी जीविका चलाते हैं।
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स्वर्णमुखी नदी (आंध्र प्रदेश): तिरुपति के पास बहने वाली इस नदी के बारे में मान्यता है कि पहाड़ियों से घिसकर सोने के कण इसके पानी में मिल जाते हैं।
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सोनभद्र (उत्तर प्रदेश): यहाँ की सोन और रिहंद नदियां हमेशा से खनिज संपदा और सोने के भंडारों को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। यहाँ आज भी सर्वे और रिसर्च का काम जारी है।
कैसे निकाला जाता है नदियों से सोना?
नदी के पानी से सोना निकालने की प्रक्रिया को ‘प्लेसर माइनिंग’ (Placer Mining) कहा जाता है। इसमें सबसे प्रसिद्ध तरीका ‘पैनिंग’ (Panning) है। इसमें एक बड़ी कड़ाही जैसी प्लेट में नदी की रेत और पानी को भरकर विशेष तरीके से घुमाया जाता है। सोना भारी होने के कारण बर्तन की तली में बैठ जाता है, जबकि हल्की रेत और गंदगी पानी के साथ बह जाती है। बड़े स्तर पर इसके लिए ‘स्लुइसिंग’ और ‘ड्रेजिंग’ मशीनों का उपयोग भी होता है।
मोंटाना की नदियों में सोने के साथ ‘नीलम’ का भी खजाना
मोंटाना की मिसौरी नदी का ‘एल डोराडो बार’ इलाका इतना खास है कि यहाँ सोने के साथ-साथ कीमती नीलम (Sapphires) भी मिलते हैं। वहीं यहाँ की ‘बिग होल नदी’ से शुरुआती सालों में ही करीब $50 लाख से ज्यादा का सोना निकाला गया था।
ये नदियां इस बात का प्रमाण हैं कि कुदरत ने अपने खजाने सिर्फ ज़मीन के नीचे ही नहीं, बल्कि बहते पानी के बीच भी छुपा कर रखे हैं। हालांकि इन नदियों से मिलने वाला सोना बहुत बारीक होता है, लेकिन इसने हज़ारों परिवारों की किस्मत बदली है।















