
- 23 फरवरी को सीएचसी कुरावली में लगेगा विशाल पुरुष नसबंदी कैम्प
मैनपुरी – जनसंख्या नियंत्रण के तहत नसबंदी कराने वालों के लिए एक खुशखबरी है। मैनपुरी में आगामी 23 फरवरी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुरावली पर विशाल मेगा पुरुष नसबंदी शिविर का आयोजन किया जा रहा है। सीएमओ डॉ0 ए0के. पाण्डेय ने योजना से जुड़े सभी स्वास्थ्य कर्मियों से अधिक से अधिक संख्या में लोगों को पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरित कर लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने नसबंदी कराने के बाद नसवंदी असफल होने पर लाभार्थी को 60 हजार रुपये और मृत्यु होने पर चार लाख रुपये दिए जाने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ डॉ0 ए0के. पाण्डेय ने बताया कि मैनपुरी जनपद मिशन परिवार विकास में आने कारण नसबंदी कैम्प में महिला नसबंदी पर 2000 रुपये सरकार की ओर से लाभार्थी के सीधे खाते में दिए जाते हैं। पुरुष नसबंदी कराने पर पुरुषों को सरकार की ओर से 3000 रुपये की धनराशि सीधे खाते में दी जाती है। साथ ही आशा प्रेरक को महिला नसबंदी पर 300 रुपया व पुरुष नसबंदी पर 400 रुपया सीधे खाते में दी जाती है। लाभार्थी को अपना आधारकार्ड व बैंक पासबुक लाना अनिवार्य होता है।
बिना चीरा और बिना टांका पुरुष नसबंदी का आसान और सुरक्षित तरीका
एन.एस.वी. (पुरुष नसबंदी) – इसमें ना तो चीरा लगता है और ना टांका लगता है। एक छोटा सा सुराग जिसमें चीरा व टांका नहीं लगाया जाता है। इस ऑपरेशन में 2 से 5 मिनट का समय लगता है। इसमें व्यक्ति ऑपरेशन के 10 मिनट बाद अपने आप चल कर घर आ सकता है। परिवार सीमित रखने की जिम्मेदारी पुरुषों को भी निभानी चाहिए। टांका कटवाने के लिए उन्हें अस्पताल नहीं आना पड़ता है।
परिवार नियोजन के नोडल अधिकारी डॉ. जी.पी. शुक्ला
आगामी 23 फरवरी को सीएचसी कुरावली में विशाल पुरुष नसबंदी कैंप का आयोजन किया जा रहा है। सभी चिकित्सा अधिकारियों, बीसीपीएम और बीपीएम को पहले ही तैयारियां पूर्ण करने के लिए निर्देशित कर दिया गया है। सभी एएनएम, संगिनी और आशा को पुरुष नसबंदी हेतु लक्ष्य निर्धारित करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।
नहीं पड़ता है कोई दुष्प्रभावरिसर्च में यह बात सामने आ चुकी है कि नसबंदी करवाने से पुरुषों की कामेच्छा, पौरुष, यौन सुख आदि में किसी तरह की कोई कमी नहीं आती है और ना ही इरेक्शन हासिल करने में या फिर ऑर्गैज्म हासिल करने की क्षमता में कमी आती है। इसका कारण ये है कि नसबंदी करवाने के बाद शरीर में टेस्टोस्टेरॉन के लेवल में कोई बदलाव नहीं होता है। सिर्फ इजैक्युलेशन के दौरान स्पर्म को निकलने से रोक दिया जाता है।












