
Indian Railway Station Masters Strike: रेल यात्रियों के लिए मई का अंतिम दिन मुसीबत भरा साबित हो सकता है. यदि सरकार ने कोई उपाय नहीं किया. तो देशभर के करीब 35 हजार स्टेशन मास्टर 31 मई को एक साथ हड़ताल (Strike) पर जा सकते हैं. रेलवे की उदासीनता के कारण स्टेशन मास्टरों ने अपनी ओर से रेलवे बोर्ड (Railway Board) को एक नोटिस भेजा है. इस नोटिस में स्टेशन मास्टरों ने 31 मई को हड़ताल पर जाने की घोषणा की है. इन स्टेशन मास्टरों (Station Masters) की मांग है कि उनके संवर्ग में खाली पदों को जल्द भरा जाए.
वर्तमान में स्टेशन मास्टरों को प्रत्येक आठ घंटे की बजाय 12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ती है. हालांकि एक विकल्प जरूर है. स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे हड़ताल के इस फैसले को बदल भी सकते हैं. आपको जानकरी के लिए बता दें कि स्टेशन मास्टरों की मांग है कि रेलवे मई के अंत से पहले उनकी मांगों को पूरा करे.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन पिछले साल अक्टूबर से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है.
क्यों हो रही है ये हड़ताल?
ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन (All India Station Masters Association) के अध्यक्ष धनंजय चंद्रात्रे का कहना है कि अब उनके पास हड़ताल के अलावा कोई ऑप्शन नहीं है.
इस समय पूरे देश में 6,000 से भी अधिक स्टेशन मास्टरों की कमी है और रेलवे प्रशासन इस पद पर भर्ती नहीं कर रहा है. इस वजह से देश के आधे से भी अधिक स्टेशनों पर महज सिर्फ 2 ही स्टेशन मास्टर पोस्टेड हैं. यूं तो स्टेशन मास्टरों की शिफ्ट आठ घंटे की होती है.इस हिसाब से इन्हें एक स्टेशन पर तीन स्टेशन मास्टरों की जरूरत होती है. लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से इन्हें हर रोज 12 घंटे की शिफ्ट करनी होती है. धनंजय चंद्रात्रे ने बताया कि अगर सरकार स्टेशन मास्टरों की मांगों पर गौर करती है. तो ही हम अपने इस निर्णय को बदल सकते हैं.
स्टेशन मास्टर्स की किल्लत
जिस दिन किसी स्टेशन मास्टर का साप्ताहिक अवकाश होता है. उस दिन किसी दूसरे स्टेशन से कर्मचारी बुलाना पड़ता है. ऐसे में अगर किसी स्टाफ की तबीयत खराब हो जाए या उनके घर में कोई इमर्जेंसी हो जाए. तो इतने कम स्टाफ में छुट्टी आदि मैनेज करना बहुत दिक्कत का काम है.
इन मांगों को लेकर हो रही है हड़ताल
भारतीय रेलवे में सभी खाली पदों को जल्द भरा जाए.
रेलवे के सभी कर्मचारियों को बिना किसी अधिकतम सीमा के रात्रि ड्यूटी भत्ता बहाल किया जाए.
स्टेशन मास्टरों के संवर्ग में एमएसीपी (MACP) का फायदा 16.02.2018 के बजाय 01.01.2016 से प्रदान किया जाए.
संशोधित पदनामों के साथ संवर्गों का पुनर्गठन किया जाए.
ट्रेनों को सेफ और समय पर चलने में उनके योगदान के लिए स्टेशन मास्टरों को तनाव-सुरक्षा भत्ता प्रदान किया जाए.
रेलवे का निगमीकरण और निजीकरण रोका जाए.
न्यू पेंशन योजना बंद की जाए और पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए.










