
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापारिक संबंधों को लेकर बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स देशों को अब अपनी आर्थिक संभावनाओं को केवल कागजी बातों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के एक ठोस और व्यावहारिक नेटवर्क में तब्दील करना होगा। वैश्विक मंच पर बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता, आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन) में आ रही रुकावटों और विभिन्न देशों पर बनाए जा रहे आर्थिक दबावों का जिक्र करते हुए पेजेश्कियन ने कहा कि ब्रिक्स की असली ताकत सामूहिक क्षमता को धरातल पर उतारने में ही निहित है।
पीएम मोदी के प्रयासों की सराहना और निजी क्षेत्र को बढ़ावा अपने संबोधन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने शानदार मेजबानी के लिए भारत सरकार और यहां की जनता का दिल से आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस विजन की जमकर सराहना की, जो ब्रिक्स सहयोग को एक नए मुकाम पर ले जाने के लिए लगातार प्रयासरत है। पेजेश्कियन का मानना है कि जब तक निजी क्षेत्र, कारोबारी संस्थाएं और नए उद्यमी इस अभियान से नहीं जुड़ेंगे, तब तक ब्रिक्स के सहयोग को वास्तविक आर्थिक नतीजों में बदलना मुमकिन नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि ब्रिक्स की असली क्षमता केवल सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बड़े आकार में नहीं है, बल्कि इस बात में है कि वे आपस में व्यापार और साझा वित्तपोषण को कितनी मजबूती से जोड़ पाते हैं।
वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स का दबदबा: ब्राजील के विदेश मंत्री का बयान बिजनेस फोरम में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि ‘ग्लोबल साउथ’ की अर्थव्यवस्थाएं पिछले कुछ दशकों में काफी तेजी से उभरी हैं। विएरा के अनुसार, 1960 के दशक में दुनिया की कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की हिस्सेदारी मात्र 20 प्रतिशत के आसपास थी, जो आज बढ़कर 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। मौजूदा समय में अकेले ब्रिक्स देश ही पूरे वैश्विक आर्थिक उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और संरक्षणवाद के इस दौर में सभी उत्पादन क्षेत्रों का आपस में सहयोग करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किए मजबूत आंकड़े भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सम्मेलन में एक लचीली और मजबूत आपूर्ति शृंखला के निर्माण पर बल दिया। उन्होंने डेटा प्रस्तुत करते हुए बताया कि साल 2003 में ब्रिक्स देशों का वैश्विक वस्तु निर्यात महज 900 अरब डॉलर था, जो 2024 तक आते-आते उछलकर लगभग 6 खरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस दौरान वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी 12 प्रतिशत से बढ़कर सीधे 24 प्रतिशत पर आ गई है।
2000 से अधिक दिग्गजों का महाजुटान और 44 सिफारिशें गोयल ने जानकारी दी कि इस ब्रिक्स बिजनेस फोरम में दुनिया भर से 2,000 से अधिक प्रमुख कारोबारी नेताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस महाजुटान में गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने, कृषि, सेवा क्षेत्र, महिला उद्यमिता और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। फोरम के समापन पर ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल ने व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा देने के लिए 44 से अधिक प्रमुख सिफारिशों वाली एक विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट भी जारी की।
दिग्गज वैश्विक नेताओं की मौजूदगी और ऐतिहासिक क्षण इस बहुचर्चित फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत ब्रिक्स समूह के कई शीर्ष नेता एक साथ मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में इन सभी वैश्विक दिग्गजों ने एक साथ आकर सामूहिक तस्वीर (फैमिली फोटो) खिंचवाई, जो वैश्विक मंच पर ब्रिक्स की एकजुटता और मजबूत होती ताकत का प्रतीक बन गई।















