इन मंदिरों में भी है जन्माष्टमी की धूम, यहाँ करे भगवान कृष्ण के LIVE दर्शन….

 

नई दिल्ली। इस बार जन्माष्टमी पर कुछ विशेष ग्रह संयोग बन रहे हैं। पंचांगों के अनुसार इस बार जन्माष्टमी पर वृषभ लग्न, अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है जो द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म के समय बना था। जन्माष्टमी भी दो दिन मनाई जाएगी। स्मार्त मतानुसार 2 सितंबर को और वैष्णव मतानुसार 3 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। द्वापर युग में श्रीकृष्ण के जन्म जैसा यह संयोग 2 सितंबर को बन रहा है। इस दिन मध्यरात्रि में 12 बजे अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ लग्न का संयोग रहेगा।

भाद्रपद की अष्टमी

उज्जैनी पंचांगों के अनुसार भाद्रपद की अष्टमी तिथि 2 सितंबर (रविवार) को रात 8.47 से अगले दिन 3 सितंबर (सोमवार) को शाम 7.19 बजे तक रहेगी, जबकि रोहिणी नक्षत्र रविवार रात 8.48 से सोमवार रात 8.04 बजे तक रहेगा। रविवार रात 10.36 से रात 12.35 बजे तक वृषभ लग्न रहेगा। श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि, वृषभ लग्न, अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। 2 सितंबर को यह संयोग बनने से जयंती योग बन रहा है।

स्मार्त और वैष्णव मत में भेद

2 सितंबर को पूजा का समय रात 12.03 से 12.48 बजे तक रहेगा। 2015 में स्मार्त और वैष्णव मत वालों ने एक ही दिन जन्माष्टमी मनाई थी। 3 सितंबर को रात 8 बजे तक अमृतसिद्धि योग रहेगा। वैष्णव मत में उदया तिथि के अनुसार त्योहार मनाया जाता है। उदया तिथि में अष्टमी 3 सितंबर को है, इसलिए वैष्णव मत वाले इस दिन पर्व मनाएंगे। स्मार्त मत में जिस दिन अष्टमी तिथि मध्यरात्रि में होती है, उस दिन जन्माष्टमी मनाई जाती है।

 

janmashtami

भगवान कृष्ण के जन्म दिवस को हिंदू धर्म में जन्माष्टमी के पर्व के तौर पर मनाया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के भक्त इस बार जन्माष्टमी का उत्सव 2 सितंबर को मनाएंगे।

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कृष्ण जन्मोत्सव को लेकर ब्रज में तो जबरदस्त उत्साह है ही, साथ ही पूरे वृन्दावन को भी दुल्हन की तरह सजाया गया है। मथुरा और वृन्दावन में जन्माष्टमी के मौके पर भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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लेकिन इसके सहित भगवान श्रीकृष्ण के कई और ऐसे मंदिर हैं, जहां अभी से ही जन्माष्टमी की धूम है। आइये आपको रूबरू करवाते हैं भगवान श्रीकृष्ण के 15 प्रसिद्द मंदिरों से…

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जन्माष्टमी के मौके पर वृन्‍दावन के मशहूर बांके बिहारी मंदिर की छटा देखते ही बनती है। जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर में भक्‍तों का तांता लगा रहता है। बता दें कि बांके बिहारी को साक्षात राधा-कृष्‍ण का ही रूप माना जाता है।

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द्वारकाधीश मंदिर द्वारका का मुख्य मंदिर है, जिसे जगत मंदिर (ब्रह्मांड मंदिर) भी कहा जाता है। कहा जाता है कि द्वारकाधीश मंदिर का मुख्य मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है। द्वारकाधीश मंदिर आम जनता के लिए सुबह 7 बजे से रात 9:30 बजे तक खुला रहता है।

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भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का पर्याय रहा कृष्ण का मंदिर दिल्ली के पूर्व में स्थित है। सभी इसे इस्कॉन मंदिर के नाम से जानते हैं। इस मंदिर को अन्दर से और बाहर से पूरी तरह से पत्थरों से बनवाया गया है।

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जुगल किशोर मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। इसे काशी घाट मंदिर के नाम से भी जानते हैं। इसका निर्माण रेड सैंड स्टोन से करवाया गया है। जन्माष्टमी के दिन यहां भक्तों की भीड़ देखते बनती है।

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केरल के गुरुव्यार मंदिर को भगवान विष्णु का निवास स्थान भी कहा जाता है। इस मंदिर की गिनती भगवान श्रीकृष्ण के सबसे महत्वपूर्ण मंदिरों में होती है। इसे साउथ इंडिया का ‘द्वारका मंदिर’ भी कहा जाता है। इस मंदिर में केवल हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है।

shri krishan udipi

उडुपी कर्नाटक राज्य का एक शहर है। यहां का श्रीकृष्ण मंदिर उडुपी के टॉप दस मंदिरों में से एक है। यह भगवान श्रीकृष्ण का प्रख्यात मंदिर है।

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बांके बिहारी मंदिर की तरह गोविन्द देव जी भगवान श्रीकृष्ण के सुप्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह जयपुर शहर में स्थित है। आपको बता दें कि जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर में चहल-पहल देखने को बनती है।

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उदयपुर का श्रीनाथजी टेम्पल भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किया गया है। कहा जाता है कि इस मंदिर में मांगी गई दुआएं कभी अधूरी नहीं जाती। ऐसे में जन्माष्टमी के दिन इस मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ना लाजमी है।

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राजगोपालस्वामी मंदिर को दक्षिण का ‘द्वारका मंदिर’ कहा जाता है। दक्षिण भारत के सभी कृष्ण मंदिरों में स्वामी मंदिर की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मंदिर को दक्षिण भारत का द्वारका कहा जाता है।

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यह मंदिर भी दक्षिण भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है। कर्नाटक के मैसूर स्थित इस वेणुगोपाल मंदिर का नजारा बहुत ही अद्भुत है। कृष्ण सागर बांध के समीप बने इस मंदिर भगवान वंशीधर बांसुरी बजाते हुए नजर आते हैं।

मंत्र

ऊं श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते । देहि मे तनयं कृष्णं त्वामहं शरणं गत: ।।

कैसे करें जाप :

इस मंत्र को जन्माष्टमी की रात्रि में वृषभ लग्न, रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में 21 माला जाप करना है। माला स्फटिक की हो। मंत्र जाप के लिए घर के पूजा स्थान में पीले रंग का आसन बिछाकर बैठ जाएं। सामने पटिए पर पीला रेशमी कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान कृष्ण की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इस पर मोरपंख लगाएं। मूर्ति के सामने एक कटोरी में माखन और मिश्री भरकर रखें। दूसरी कटोरी में शुद्ध जल भरकर रखें।

अपनी इच्छित कामना की पूर्ति के लिए हाथ में पूजा की सुपारी, अक्षत, पीला पुष्प और 1 रुपए का सिक्का रखकर संकल्प बोलें। इसके बाद धूप-दीप करके मंत्र जाप प्रारंभ करें। यह मंत्र पति-पत्नी दोनों साथ में जाप करें तो बेहतर रहेगा। जाप पूरे होने के बाद अगले दिन 10 वर्ष से कम आयु के 7 बच्चों को भोजन कराएं, वस्त्र भेंट करें। माखन-मिश्री का प्रसाद ग्रहण करें और दूसरी कटोरी में रखा जल किसी डिब्बी में भरकर सुरक्षित रख लें। इस जल की थोड़ी-थोड़ी मात्रा प्रतिदिन पति-पत्नी ग्रहण करें। जन्माष्टमी की रात्र यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा। इसके बाद प्रतिदिन एक माला इस मंत्र की जाप करते रहें। श्ाीघ्र ही खुशखबरी सुनाई देगी।

 

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