नई दिल्ली/इस्लामाबाद: अरब सागर की लहरों पर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक खींचतान तेज हो गई है। पाकिस्तान द्वारा मिसाइल परीक्षण के लिए जारी किए गए अलर्ट के जवाब में भारत ने न केवल बड़े क्षेत्र के लिए अपना नोटिस जारी किया, बल्कि समुद्री सीमा के पास ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर अपनी सैन्य श्रेष्ठता का भी प्रदर्शन किया।
नोटम (NOTAM) की जंग: किसका क्षेत्र कितना बड़ा?
सैन्य प्रोटोकॉल के तहत जब भी कोई देश मिसाइल परीक्षण करता है, तो वह ‘नोटिस टू एयर मिशन’ (NOTAM) जारी कर नागरिक विमानों और जहाजों को उस क्षेत्र से दूर रहने की चेतावनी देता है।
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पाकिस्तान का कदम: पाकिस्तान ने 200 किलोमीटर के दायरे में मिसाइल परीक्षण के लिए 20 से 21 अप्रैल तक का नोटम जारी किया था।
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भारत का जवाब: पाकिस्तान के ठीक बाद भारत ने 400 किलोमीटर के विस्तृत क्षेत्र के लिए 22 से 25 अप्रैल तक का नोटम जारी कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षण क्षेत्र का दोगुना होना भारत की लंबी दूरी की मिसाइल मारक क्षमता और रणनीतिक बढ़त को दर्शाता है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’: पानी में पराक्रम
मिसाइल अलर्ट के बीच भारतीय सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए अपनी ताकत दिखाई।
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सटीक ऑपरेशन: इस अभ्यास में विशेष यूनिट्स ने उथले जल क्षेत्रों (Shallow Waters) में तेज और सटीक कार्रवाई का अभ्यास किया।
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अत्याधुनिक तकनीक: सैनिकों ने अत्याधुनिक असॉल्ट बोट्स के जरिए कठिन परिस्थितियों में तेजी से मूवमेंट करने की अपनी क्षमता को परखा।
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उद्देश्य: इस अभ्यास का मकसद समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और किसी भी घुसपैठ या संभावित खतरे के प्रति ‘क्विक रिस्पॉन्स’ (त्वरित प्रतिक्रिया) सुनिश्चित करना था।
क्यों संवेदनशील है यह स्थिति?
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान द्वारा चिन्हित परीक्षण क्षेत्र एक-दूसरे की समुद्री सीमाओं के काफी करीब हैं।
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रणनीतिक संकेत: दोनों देशों का एक ही समय पर मिसाइल परीक्षण और सैन्य अभ्यास करना यह संकेत देता है कि क्षेत्र में सैन्य निगरानी (Monitoring) उच्चतम स्तर पर है।
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अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल: हालांकि यह गतिविधियां पूर्व सूचना देकर की गई हैं, लेकिन एक साथ दो नोटम जारी होने से अंतरराष्ट्रीय विमानन और समुद्री यातायात पर भी इसका असर पड़ा है।
विशेषज्ञों की राय
पूर्व सैन्य अधिकारियों का कहना है कि भारत का 400 किमी का नोटम और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश है कि भारतीय सेना न केवल रक्षा के लिए तैयार है, बल्कि प्रो-एक्टिव मोड में भी है।
फिलहाल, अरब सागर में चल रही इन सैन्य गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी 25 अप्रैल तक चलने वाले इन परीक्षणों के दौरान कौन सी नई तकनीक या मिसाइल प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाता है।















