
नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बदलते समीकरणों के बीच भारत और रूस की अटूट दोस्ती एक बार फिर पूरे शबाब पर नजर आई। राजधानी नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के बीच एक बेहद अहम द्विपक्षीय वार्ता आयोजित हुई। इस महाबैठक में दोनों शीर्ष नेताओं ने न केवल अपने रणनीतिक संबंधों की गहराई को परखा, बल्कि दुनिया भर में चल रहे विभिन्न संघर्षों, व्यापारिक चुनौतियों और भविष्य की रणनीतियों पर खुलकर विचार-विमर्श किया। भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन की यह तीन दिवसीय भारत यात्रा दोनों देशों के लिए बेहद ऐतिहासिक मानी जा रही है।
आर्थिक और सामरिक सहयोग को नए आयाम देने की तैयारी भारत मंडपम में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के हर महत्वपूर्ण पहलू पर गहन समीक्षा की गई। विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, वार्ता में रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान, राजनीतिक समन्वय, कौशल गतिशीलता (स्किल मोबिलिटी) और जन-जन के बीच जुड़ाव जैसे प्रमुख स्तंभों पर प्रगति का खाका तैयार किया गया। दोनों देशों ने रणनीतिक और व्यापारिक मोर्चे पर एक-दूसरे का हाथ और मजबूती से थामने का संकल्प दोहराया। इस मौके पर नेताओं ने पहली बार भारत में 9 से 11 सितंबर तक आयोजित हुई रूस की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी ‘इनोप्रोम इंडिया’ की सराहना की। दोनों नेताओं ने खुद इस प्रदर्शनी का दौरा किया और वहां मौजूद प्रतिभागियों व उद्यमियों से बातचीत कर औद्योगिक रिश्तों को रफ्तार देने का भरोसा दिया।
समुद्री सुरक्षा, काला सागर तनाव और भारतीय नाविकों पर चर्चा बैठक का एक बड़ा हिस्सा वैश्विक और क्षेत्रीय संकटों पर केंद्रित रहा। दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात और काला सागर (ब्लैक सी) क्षेत्र में जारी सशस्त्र संघर्षों पर गंभीर बातचीत हुई। विशेष रूप से काला सागर में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों और उससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता जताई गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान रूसी राष्ट्रपति के सामने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। यूक्रेन संकट और अन्य वैश्विक संघर्षों पर भारत का रुख दोहराते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि किसी भी समस्या का स्थायी समाधान युद्ध से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। भारत शांति स्थापना के हर प्रयास में अपना योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ब्रिक्स 2026 और ‘विशेष रणनीतिक साझीदारी’ पर मुहर वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के संदर्भ में भी दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने बहुपक्षीय मंचों पर आपसी तालमेल मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने माना कि तमाम वैश्विक दबावों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद भारत और रूस की ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझीदारी’ न केवल अटूट रही है, बल्कि इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है। चालू वर्ष में दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात थी, इससे पूर्व वे 31 अगस्त को बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा और पीएम मोदी को रूस का न्योता वार्ता के सौहार्दपूर्ण समापन के साथ राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस आने का औपचारिक निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार कर लिया है, जिसकी अंतिम तारीखें कूटनीतिक माध्यमों से तय की जाएंगी। बैठक के अंत में सांस्कृतिक आदान-प्रदान की खूबसूरत झलक देखने को मिली जब प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को महान तमिल कवि तिरुवल्लुवर की कालजयी रचना ‘तिरुक्कुरल’ का रूसी अनुवाद भेंट किया।















