भोपाल: देश विरोधी गतिविधियों और टेरर मॉड्यूल के खिलाफ मध्य प्रदेश एटीएस (Anti-Terrorism Squad) को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एजेंसी ने लगातार ताबड़तोड़ एक्शन लेते हुए महज चार दिनों के भीतर पांचवीं बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस बार एटीएस ने मध्य प्रदेश के धार और बिहार के मधुबनी से दो और संदिग्ध आतंकियों को दबोचा है। पकड़े गए संदिग्धों की पहचान धार के हाजी अजहर और बिहार के मधुबनी के इजहार उल हक के रूप में हुई है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों को देश में फैले एक बहुत बड़े आतंकी नेटवर्क के खुलासे के संकेत मिले हैं।
चार दिन में 5 संदिग्ध दबोचे, ऐसे फैला था पूरा जाल
एमपी एटीएस इस समय बेहद आक्रामक रुख में नजर आ रही है। एजेंसी ने पिछले 4 दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस पूरे ऑपरेशन की शुरुआत भोपाल से हुई थी, जहाँ सबसे पहले मोहम्मद फराज को शिकंजे में लिया गया। इसके बाद देवबंद से नईम अब्दुल्ला और राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव की गिरफ्तारी हुई। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एटीएस ने धार से हाजी अजहर और बिहार से इजहार को हिरासत में लेकर नेटवर्क की कमर तोड़ दी है।
धार से पकड़ा गया हाजी अजहर, साथियों से सीधे संपर्क में था
ताजा मिली जानकारी के अनुसार, एटीएस की एक विशेष टीम ने मध्य प्रदेश के धार जिले में दबिश देकर हाजी अजहर को अपनी हिरासत में लिया। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि अजहर पहले से गिरफ्तार हो चुके आरोपियों के लगातार संपर्क में था और इस पूरे नेटवर्क के लिए एक सक्रिय सदस्य के तौर पर काम कर रहा था। अजहर की गिरफ्तारी को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि उससे पूछताछ में कई और चौंकाने वाले सुराग हाथ लग सकते हैं।
बिहार का इजहार उल हक बना था मॉड्यूल का ‘गुर्गा’
नेटवर्क का दूसरा बड़ा सिरा बिहार के मधुबनी में मिला, जहाँ से इजहार उल हक नाम के युवक को गिरफ्तार किया गया है। एटीएस के अधिकारियों के मुताबिक, इजहार इस टेरर मॉड्यूल को संचालित करने में मुख्य गुर्गे (हैंडलर/मैनेजर) की भूमिका निभा रहा था। वह नेटवर्क के जमीनी कामों को अंजाम देने में बेहद सक्रिय था। बिहार से गिरफ्तारी के बाद एटीएस उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर मध्य प्रदेश आ रही है, ताकि यहाँ अन्य आरोपियों के सामने बैठाकर पूछताछ की जा सके और मुख्य सरगना का पता लगाया जा सके।
मोबाइल खंगालने पर खुले राज: पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए कॉल
सुरक्षा एजेंसियों को आरोपियों के पास से जब्त किए गए मोबाइल फोन और डिजिटल दस्तावेजों की जांच में बेहद संवेदनशील और पुख्ता सबूत मिले हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इन संदिग्धों के फोन रिकॉर्ड्स में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संदिग्ध नंबरों से बातचीत और चैट के इनपुट मिले हैं। इन अंतरराष्ट्रीय कॉल्स के सामने आने के बाद अब केंद्रीय जांच एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं और इस पूरे नेटवर्क के ग्लोबल कनेक्शन की गहराई से तफ्तीश की जा रही है।
11 जून से शुरू हुआ था खुफिया ऑपरेशन
जांच में यह साफ हो गया है कि धार से पकड़ा गया हाजी अजहर, भोपाल और देवबंद से पकड़े गए आरोपियों का सीधा मददगार था। इस पूरे मामले में पहली गिरफ्तारी 11 जून को भोपाल के काजी कैंप इलाके से हुई थी, जहाँ एक गुप्त और बेहद सुरक्षित ऑपरेशन में मोहम्मद फराज को उठाया गया था। इसके बाद कड़ियां जुड़ती गईं और 13 जून को देवबंद से नईम, 14 जून को अलवर से शाकिर और अब बाकी दो आरोपी दबोचे गए। एटीएस का दावा है कि ये सभी एक ही बड़े आतंकी सिंडिकेट के मोहरे हैं।
प्रतिबंधित संगठन PFI और विदेशी हैंडलर्स पर शक
एमपी एटीएस की शुरुआती पूछताछ में यह भी अंदेशा जताया गया है कि इस मॉड्यूल के तार प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) और अन्य कट्टपंथी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। एजेंसियां अब इस बात की कड़ाई से पड़ताल कर रही हैं कि सीमा पार बैठे कौन से आका इन्हें फंड और निर्देश दे रहे थे और भारत में इनके निशाने पर कौन-कौन से शहर थे।
मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग और विदेश भागने की थी फिराक
इस पूरी साजिश के पीछे के इरादे कितने खौफनाक थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एटीएस के मुताबिक ये आरोपी देश में किसी बड़े हमले या सिलसिलेवार धमाकों की साजिश रच रहे थे। इतना ही नहीं, गिरोह के कुछ सदस्यों को बकायदा मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग भी दी जा रही थी ताकि वे क्लोज कॉम्बैट (अचानक हमले) के लिए तैयार हो सकें। इसके बाद इन्हें सुरक्षित रास्ते से विदेश भेजने की भी योजना तैयार थी, जिसे मुस्तैद सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया।















