लोकसभा में PM मोदी का शंखनाद: ‘राष्ट्र निर्माण में आधी आबादी को मिल रही बड़ी हिस्सेदारी, संसदीय इतिहास का यह सबसे अहम पल’

नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के पहले दिन केंद्र की मोदी सरकार ने महिलाओं को ऐतिहासिक सौगात देते हुए महिला आरक्षण, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित तीन महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश किए। इस बिल पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस जारी है, जिसके लिए 18 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपना संबोधन देते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र का एक ‘स्वर्णिम क्षण’ करार दिया।

“यह देश की अमानत है”: पीएम मोदी ने बताया बिल का महत्व

लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “राष्ट्र के जीवन में कुछ ऐसे मोड़ आते हैं, जो इतिहास बन जाते हैं। समाज की सोच और नेतृत्व की क्षमता जब उस पल को पहचान लेती है, तो वह पूरे देश की अमानत और एक मजबूत धरोहर बन जाती है।” पीएम ने विश्वास जताया कि भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

विरोध करने वालों को पीएम की चेतावनी

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के दौरान उन राजनीतिक दलों और नेताओं पर भी निशाना साधा जिन्होंने अतीत में महिला आरक्षण का विरोध किया था। पीएम मोदी ने कहा, “हमारे देश में महिला आरक्षण को लेकर जब-जब चर्चा हुई और उसके बाद जब चुनाव आए, तो महिलाओं ने उन लोगों को कभी माफ नहीं किया जिन्होंने उनके अधिकारों का विरोध किया। साल 2024 के चुनाव में यह मुद्दा इसलिए शांत रहा क्योंकि तब इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था।”

18 घंटे की मैराथन चर्चा और विपक्ष के सवाल

महिला आरक्षण बिल पेश होने के साथ ही सदन में गहमागहमी का माहौल है। विपक्ष जहां इस बिल के समर्थन की बात कर रहा है, वहीं कोटा के भीतर कोटा (OBC और मुस्लिम महिलाओं के लिए आरक्षण) और जनगणना-परिसीमन के पेंच पर सरकार को घेर रहा है। सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि यह बिल महिलाओं को नीति-निर्माण में बराबर की हिस्सेदारी देने के लिए लाया गया है। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लोकसभा की 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी।

सदन में ऐतिहासिक पल का गवाह बनेगा नया भारत

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में सांसदों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कानून नहीं, बल्कि आधी आबादी के सम्मान और सामर्थ्य को पहचान देने का संकल्प है। सदन की कार्यवाही के दौरान कई बार हंगामे की स्थिति भी बनी, लेकिन सरकार इस बिल को पारित कराकर एक मजबूत संदेश देने की तैयारी में है।

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