अबू धाबी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने विशेष दौरे पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहुंचे, जहां उनका भव्य और अभूतपूर्व स्वागत किया गया। युद्ध के साये में जी रहे पश्चिम एशिया के बीच पीएम मोदी की यह यात्रा कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रधानमंत्री ने यूएई को भारत का सच्चा मित्र और अपना ‘दूसरा घर’ बताते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी संकट की घड़ी में भारत मजबूती से यूएई के साथ खड़ा है।
आसमान में सम्मान: F-16 विमानों ने दी सलामी
प्रधानमंत्री के प्रति यूएई के सम्मान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैसे ही पीएम मोदी का विमान यूएई की सीमा में दाखिल हुआ, वहां की वायुसेना के F-16 लड़ाकू विमानों ने उनके जहाज को एस्कॉर्ट किया। खुद यूएई के राष्ट्रपति एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री की अगवानी करने पहुंचे, जहां उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया। पीएम मोदी ने इस भावुक स्वागत के लिए आभार जताते हुए इसे 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान बताया।
𝐈𝐧 𝐚 𝐬𝐭𝐫𝐢𝐤𝐢𝐧𝐠 𝐠𝐞𝐬𝐭𝐮𝐫𝐞 𝐨𝐟 𝐝𝐢𝐩𝐥𝐨𝐦𝐚𝐭𝐢𝐜 𝐡𝐨𝐧𝐨𝐫, 𝐔𝐀𝐄 𝐅-𝟏𝟔 𝐟𝐢𝐠𝐡𝐭𝐞𝐫 𝐣𝐞𝐭𝐬 𝐞𝐬𝐜𝐨𝐫𝐭𝐞𝐝 𝐏𝐌 𝐌𝐨𝐝𝐢'𝐬 𝐚𝐢𝐫𝐜𝐫𝐚𝐟𝐭 𝐮𝐩𝐨𝐧 𝐞𝐧𝐭𝐞𝐫𝐢𝐧𝐠 𝐔𝐀𝐄 𝐚𝐢𝐫𝐬𝐩𝐚𝐜𝐞, 𝐮𝐧𝐝𝐞𝐫𝐬𝐜𝐨𝐫𝐢𝐧𝐠 𝐭𝐡𝐞 𝐩𝐫𝐨𝐟𝐨𝐮𝐧𝐝 𝐠𝐥𝐨𝐛𝐚𝐥… pic.twitter.com/y1hKUcEceg
— BJP (@BJP4India) May 15, 2026
ईरान जंग और हमलों की कड़े शब्दों में निंदा
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई पर हुए हालिया हमलों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा:
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आतंकी हमलों का विरोध: पीएम ने यूएई पर हुए हमलों की घोर निंदा करते हुए कहा कि नागरिक क्षेत्रों और सुरक्षा को निशाना बनाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।
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नेतृत्व की सराहना: उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति द्वारा कठिन परिस्थितियों में दिखाए गए संयम और साहस की प्रशंसा की।
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क्षेत्रीय अखंडता: भारत ने यूएई की राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का पूर्ण समर्थन किया।
होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया के संकट को पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बताया। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज के समुद्री मार्ग (Strait of Hormuz) का जिक्र करते हुए कहा कि इसे खुला और सुरक्षित रखना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएम ने जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए बातचीत और कूटनीति के जरिए ही समस्याओं का समाधान निकाला जाना चाहिए।
एलपीजी और रणनीतिक समझौतों पर मुहर
इस यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना भी है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में भारत और यूएई के बीच एलपीजी (LPG) आपूर्ति और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान हुआ। हालांकि, इन समझौतों की विस्तृत जानकारी अभी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह भारत की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने प्राकृतिक आपदाओं के समय यूएई द्वारा दिखाए गए मानवीय दृष्टिकोण और भारतीय परिवारों के प्रति व्यक्त की गई संवेदनाओं के लिए भी वहां के नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।















