अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित सनसनीखेज मामले ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है. पूरे 6 दिनों तक चौतरफा और गहन पड़ताल करने के बाद विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी 15 पन्नों की शुरुआती जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. हालांकि, इस संवेदनशील रिपोर्ट को शासन स्तर पर पूरी तरह से गोपनीय (कॉन्फिडेंशियल) रखा गया है और इसकी कोई भी आधिकारिक जानकारी अभी तक मीडिया के सामने नहीं लाई गई है, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से जो चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे आने वाले दिनों में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन में बड़ा हड़कंप मचा सकती हैं.
कर्मचारियों की बैकग्राउंड जांच और नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी का खुलासा
SIT की इस प्राथमिक रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने जो सबसे बड़ा दावा किया है, उसके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को इस पूरे मामले में संदिग्ध माना गया है. रिपोर्ट में इस बात का भी साफ तौर पर जिक्र है कि राम मंदिर परिसर में कर्मचारियों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया में गंभीर और नियम विरुद्ध गड़बड़ियां की गई हैं. जांच के दौरान कई ऐसे कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात मिले, जिनकी नियुक्ति का कोई लिखित और आधिकारिक आदेश (Appointment Letter) रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं था. यही नहीं, इन कर्मचारियों को रखने से पहले उनकी पृष्ठभूमि (Background Verification) की भी कोई पुख्ता जांच नहीं की गई थी. इसके अलावा, मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उसकी चौबीसों घंटे निगरानी करने वाली सुरक्षा प्रणाली में भी भारी लापरवाही के संकेत मिले हैं, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
भक्तों की संख्या बढ़ी पर चढ़ावा हुआ कम, बैंक स्टेटमेंट और आंकड़ों में भारी विसंगति
एसआईटी की तफ्तीश में यह तकनीकी पहलू भी सामने आया है कि पिछले कुछ समय में मंदिर में आने वाले चढ़ावे के ग्राफ में असामान्य रूप से उतार-चढ़ाव देखने को मिला. जब जांच टीम ने बैंक स्टेटमेंट और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की दैनिक संख्या के आंकड़ों का आपस में मिलान किया, तो कई बार ऐसी चौंकाने वाली स्थितियां पाई गईं जहां भक्तों की संख्या तो रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में बैंक में जमा कराई गई चढ़ावे की रकम बेहद कम दिखाई गई. इस भारी विसंगति को लेकर जब संबंधित प्रभारियों से पूछताछ की गई, तो उनकी तरफ से यह तर्क दिया गया कि उस विशेष समयावधि के दौरान नोटों की बजाय सिक्कों का चढ़ावा बहुत ज्यादा आया था. हालांकि, यह गोलमोल जवाब जांच एजेंसियों को संतुष्ट नहीं कर पाया है.
कुछ कर्मचारियों की संपत्ति में 5 साल में बेतहाशा बढ़ोतरी, दान का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं
एसआईटी रिपोर्ट में मंदिर से जुड़े कुछ चुनिंदा कर्मचारियों की व्यक्तिगत संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई बेतहाशा और तेजी से बढ़ोतरी का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है, जिसने वित्तीय हेरफेर के संदेह को और ज्यादा गहरा कर दिया है. हालांकि, इस पूरी जांच में सबसे बड़ी पेचीदगी यह सामने आ रही है कि जांच एजेंसी अब तक यह स्पष्ट रूप से तय नहीं कर पाई है कि वास्तव में कुल कितना चढ़ावा आया था और उसमें से कुल कितनी रकम कथित रूप से गायब या चोरी हुई है. इसकी मुख्य वजह यह है कि मंदिर में हर एक श्रद्धालु द्वारा दिए जाने वाले गुप्त दान या खुले चढ़ावे का कोई व्यवस्थित और आधुनिक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला, जिससे सटीक आंकड़ा निकालना टेढ़ी खीर बन गया है.
दूसरी ओर, चढ़ावे के इस कथित हिसाब-किताब को लेकर देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं का गुस्सा भी सोशल मीडिया और जमीन पर लगातार बढ़ता जा रहा है. कई भक्त अब खुलकर सामने आ रहे हैं और अपने द्वारा दिए गए दान की रसीद व हिसाब मांग रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है; आम आदमी पार्टी (AAP) ने गंभीर आरोप लगाया है कि एक महिला श्रद्धालु से मंदिर में चांदी की एक बड़ी प्रतिमा जमा करवाई गई थी, लेकिन उसे आज तक न तो कोई आधिकारिक रसीद मिली और न ही उस प्रतिमा का कोई अता-पता दिया गया. इसी तरह, पूर्व में भी 200 किलो चांदी की ईंटों के कथित रूप से गायब होने का मामला चर्चा में आ चुका है, जिससे यह पूरा विवाद अब बेहद पेचीदा हो गया है.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा, विहिप ने की फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग
इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उबाल आ गया है. समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को सोशल मीडिया और बयानों के जरिए उठाकर योगी सरकार को चौतरफा घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इसे सीधे तौर पर करोड़ों सनातनी भाई-बहनों की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि यह सिर्फ कोई आर्थिक या बजटीय गड़बड़ी नहीं है, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं के पवित्र विश्वास के साथ किया गया एक अक्षम्य धोखा है. वहीं, दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने, जांच की गति तेज करने और पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में कराने की पुरजोर मांग की है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद अब एसआईटी (SIT) इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच का दूसरा चरण (Phase-2) शुरू करने की तैयारी में है, ताकि सभी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को और ज्यादा पुख्ता किया जा सके और दोषियों के खिलाफ ऐसी ठोस कानूनी कार्रवाई की जा सके जो कोर्ट में टिक सके. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ ही दिनों में शासन स्तर से हरी झंडी मिलते ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और कई रसूखदार चेहरों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है.
इस पूरे सियासी और धार्मिक विवाद के बीच आज देश का सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य बड़े पदाधिकारी इस कड़ी जांच में खुद को बेकसूर साबित कर पाएंगे या फिर वे भी कड़ी कार्रवाई की जद में आएंगे? यह मामला अब सिर्फ एक साधारण कथित चोरी का नहीं रह गया है, बल्कि प्रभु श्री राम के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और निष्ठा की साख का बन चुका है, जिसका स्पष्ट जवाब पूरा देश बेहद बेसब्री से तलाश रहा है.















