दस समीतियों से वसूला जाएगा 170 करोड़ रूपए का संशोधित भूमि समायोजन शुल्क: सुनील भराला

-श्रम कल्याण परिषद् उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री ने सर्किट हाउस में की प्रेसवार्ता

भास्कर समाचार सेवा
मेरठ। श्रम कल्याण परिषद् उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री पंडित सुनील भराला  ने शनिवार को सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता की। बताया, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार जीरो टॉलरेंस के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए भ्रष्टाचार मुक्त को लेकर एक कदम और आगे बढ़े है। गाजियाबाद आवास विकास परिषद योजना में विगत वर्ष उनके द्वारा शासन को लिखे गये पत्र व हाईलेवल कमेटी का गठन उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव ने किया था, जिसमें समितिया को दी गई जमीन में भारी अनियमिताए मिली थी, अब इन 10 समीतियों से 170 करोड़ रूपए का संशोधित भूमि समायोजन शुल्क वसूला जाएगा।

श्री भराला ने कहा, इन समितियों में उत्तर रेलवे, दूर संचार, सहकारी आवास समीति, आदर्श नगर प्रगतिशील सहकारी आवास समिति, आदर्श सहकारी आवास समिति, विशाल सहकारी आवास समिति, एनआर कर्मचारी सहकारी आवास समीति, केन्द्रीय जल आयोग सहकारी आवास समीति, पंचशील सहकारी आवास समीति, फेंडस रेलवे सहकारी आवास आदि शामिल है। उनकी शिकायत पर अब ये शुरूआत हुई है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में इन सभी 10 समितियों को ब्याज समेत करीब 170 करोड़ रूपए चुकाने होंगे। जांच में इन समीतियों को दी गई जमीन में भारी अनिमित्ताएं हैं, जिसकी भरपाई इन समीतियों से करनी पड़ेगी व संशोधित शुल्क भी लिया जायेगा। श्री भराला ने आगे बताया, इन समीतियों को जीडीए 2014 के शासनादेश को आधार बनाकर जमीन आवंटन की गई थी, यह शासनादेश अवैध कॉलोनी नियमित करने के लिये समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा लाया गया था। इन समीतियों को दी गई जमीन 3000 रूपए प्रति मीटर की दर से विकास शुल्क लिया गया था, जोकि पूरी तरह से भ्रष्टाचार की पोल खोलता है और पूरी तरह से गलत था। इसी को आधार बनाकर सिद्धार्थ विहार जैसी विकसित जमीन पर मामूली 3000 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर का विकास शुल्क लिया गया था, जबकि नियमों के अनुसार भूमि दर का 40 फीसदी विकास शुल्क लिया जाना चाहिए था। इन समितियों से सटे आवंटित प्लाटों से भी 15000 रूपए प्रति स्क्वायर मीटर का शुल्क लिया गया था, नियमों के अनुसार इन समीतियों से ज्यादा विकास शुल्क लिया जाना था, लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से जानबूझकर कम शुल्क लिया गया था। लेकिन आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार के द्वारा भूमि दर का 40 फीसदी विकास शुल्क वसूला जाएगा।

जांच रिपोर्ट में मिली भारी अनियमित्ताएं
श्री भराला ने बताया, इन समितियों को जो जमीन 2002 शासनादेश के अनुसार दी गई है, उसकी जांच रिपोर्ट में भी भारी अनियमितताएं मिली हैं। नियमों की अवहेलना करते हुए इन 10 समीतियों को करीब 17 फीसदी ज्यादा जमीन दी गई है। समाजवादी पार्टी की सरकार में इन समितियों को 17 फीसद ज्यादा दी गई जमीन का पैसा भी अब वसूला जायेगा, जो आज लगभग 600 करोड़ रूपए बैठता है।

सपा सरकार का सबसे बड़ा घोटाला
श्री भराला ने आगे बताया, जमीन आवंटन घोटाले की जिस दिशा में व जिस तेजी के साथ जांच आगे बढ़ रही है और जो कार्यवाही अब तक हुई है, ऐसा प्रतीत होता है कि सिद्धार्थ विहार योजना उत्तर प्रदेश का समाजवादी पार्टी की सरकार में किया गया अब तक का सबसे बड़ा संगठित भूमि घोटाला निकलेगा।

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