
राजस्थान के 1257 करोड़ रुपए के सिंडिकेट बैंक धोखाधड़ी मामले में एनफोर्समेंट डिपार्टमेंट (ED) ने चंडीगढ़ के रहने वाले हिमांशु वर्मा को गिरफ्तार किया है। जयपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश कर ED ने हिमांशु को 10 दिन के रिमांड पर लिया है। अब उससे पूरे मामले में पूछताछ की जा रही है।
ED की जांच में सामने आया कि 2011 से 2016 के बीच उदयपुर के चार्टर्ड अकाउंटेंट मास्टर माइंड भारत बम ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से सिंडिकेट बैंक से 1257 करोड़ रुपए का कर्ज लिया। उदयपुर के भारत बम ने अपने परिजनों के नाम से 5 साल में अलग-अलग करके 1257 करोड़ के कर्ज लिए। कर्ज का यह पैसा भारत बम की शैल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए गए। पांच साल में अलग अलग समय पर लिए गए ये कर्ज कभी नहीं चुकाए गए। इस पूरे काम में चंडीगढ़ के रहने वाले हिमांशु वर्मा का भी नाम सामने आया। जिसे अब ED ने गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया।
कर्मचारियों, आदिवासियों तक के नाम से प्रॉपर्टी
ED जांच में यह सामने आया कि भारत बम और उसके सहयोगियों ने बैंक से लिए गए कर्ज को फर्जी कंपनियों के अकाउंट में गलत तरीके से ट्रांसफर किया। शैल कंपनियों को केवल इसी पैसे को डायवर्ट करने के लिए बनाया गया था। इसके अलावा ये कंपनियां कोई काम नहीं करती थी। धोखाधड़ी से लिए गए कर्ज के पैसे से भारत बम और सहयोगियों ने खूब बेनामी प्रॉपर्टी खरीदी। आदिवासियों तक के नाम से फार्म हाउस खरीदे गए। बम के यहां काम करने वाले कई कर्मचारियों के नाम से भी खूब प्रॉपर्टी खरीदी गई।
अब तक 537 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच
सिंडिकेट बैंक धोखाधड़ी के मामले में ED अब तक 537.72 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच कर चुका है। इससे पहले ED चार अलग-अलग अटैचमेंट के ऑर्डर जारी कर 478 करोड़ की प्रॉपर्टी अटैच कर चुका है। अब 56.81 करोड़ की संपत्ति के साथ यह आंकड़ा 537 करोड़ हो चुका है। हाल ही में 2.25 करोड़ के एक डिमांड ड्राफ्ट को भी अटैच किया था। इस मामले में ED की जांच जारी है।
जयपुर की दो और उदयपुर की एक ब्रांच में फ्रॉड
बैंक फ्रॉड की साजिश उदयपुर के चार्टर्ड एकाउंटेंट भारत बम ने कुछ कारोबारियों, खुद के कर्मचारियों और सिंडिकेट बैंक के जयपुर की एमआई रोड ब्रांच के अफसरों के साथ मिलकर रची। बैंक फ्रॉड के लिए फर्जी दस्तावेज, फर्जी बिल और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। शैल कंपनियों में पैसा सायफन किया। सीबीआई जांच में सिंडिकेट बैंक के कर्मचारियों की भी भूमिका सामने आई थी।
पूरा घोटाला जयपुर में सिंडिकेट बैंक की एमआई रोड, मालवीय नगर और उदयपुर की ब्रांच से किया गया। इस घोटाले में 118 लोन अकाउंट और हाउसिंग लोन अकाउंट पाए गए थे। इनके जरिए बैंक से कर्ज लिया गया और फिर चुकाया नहीं। इस मामले मं सीबीआई डेढ़ साल पहले चार्जशीट पेश कर चुकी है। अब ED की जांच जारी है।













