कानपुर। शहर की सड़कों पर सरकारी नंबर प्लेट लगाकर रौब झाड़ने वालों की अब खैर नहीं है। संभागीय परिवहन विभाग (RTO) ने ऐसे वाहन स्वामियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है जो नीलामी में खरीदे गए सरकारी वाहनों पर अभी भी ‘बीजी’ (BG) और ‘एजी’ (AG) जैसे सरकारी नंबर लगाकर घूम रहे हैं। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि निजी काम के लिए सरकारी पहचान का इस्तेमाल करना न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि अब ऐसा करने वालों के वाहनों का रजिस्ट्रेशन तक रद्द किया जा सकता है।
नीलामी के वाहनों पर सरकारी नंबर का खेल खत्म
एआरटीओ (प्रशासन) आलोक कुमार सिंह के मुताबिक, सरकारी विभागों से नीलाम हुए वाहनों को खरीदने के बाद कई लोग उनका इस्तेमाल निजी तौर पर कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक सरकारी नंबर प्लेट को विभाग में सरेंडर नहीं किया है। लोग इन नंबरों का इस्तेमाल टोल प्लाजा पर छूट पाने और पुलिस चेकिंग से बचने के लिए ‘भौकाल’ के तौर पर कर रहे हैं। विभाग ने अब ऐसे 145 वाहन स्वामियों को चिन्हित कर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
18 लोगों ने बदला नंबर, बाकी पर लटकी तलवार
प्रशासनिक सख्ती के बाद अब तक 18 वाहन स्वामियों ने समझदारी दिखाते हुए अपने सरकारी नंबर सरेंडर कर दिए हैं और नए प्राइवेट नंबर जारी करवा लिए हैं। हालांकि, अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो नोटिस मिलने के बाद भी सरकारी नंबर का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। आरटीओ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नंबर सरेंडर नहीं किए गए, तो उन वाहनों को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा, जिससे उन पर कोई भी विभागीय कार्य नहीं हो सकेगा।
टोल प्लाजा पर भ्रम और नियम विरुद्ध संचालन
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी नंबर प्लेट लगे होने के कारण अक्सर टोल प्लाजा पर कर्मियों और आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा होती है। निजी फायदे के लिए सरकारी पहचान का उपयोग करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। आरटीओ प्रशासन ने साफ किया है कि जिन लोगों ने नोटिस का जवाब नहीं दिया है, उनके खिलाफ रजिस्ट्रेशन निरस्तीकरण की अंतिम प्रक्रिया शुरू की जा रही है।












