1 अक्तूबर से बदल जाएंगे आपकी जेब से जुड़े ये 3 बड़े नियम : LPG सब्सिडी, FD और जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन पर होगा सीधा असर

नई दिल्ली।  हर महीने की पहली तारीख अपने साथ कई नए वित्तीय और प्रशासनिक बदलाव लेकर आती है। अगले महीने यानी 1 अक्तूबर से आम जनता की दिनचर्या और जेब से जुड़े कई अहम नियमों में फेरबदल होने जा रहा है। 1 तारीख से LPG सिलिंडर की सब्सिडी, बैंकों की बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज दर संबंधी नियम और जन्म-मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी। यदि आप भी इन सेवाओं का लाभ लेते हैं, तो आपके लिए इन नए बदलावों को जानना बेहद जरूरी है।

1. LPG सिलिंडर की सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य

गैस सब्सिडी को लेकर 1 अक्तूबर से नया नियम प्रभावी हो जाएगा। अब सब्सिडी वाला LPG सिलिंडर पाने के लिए उपभोक्ताओं को बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA) कराना अनिवार्य होगा।

  • क्या सप्लाई बंद होगी? नहीं, जिन उपभोक्ताओं का बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं हुआ है, उन्हें सिलिंडर की डिलीवरी मिलती रहेगी।

  • सब्सिडी का नुकसान: ऑथेंटिकेशन न कराने वाले ग्राहकों को गैस सिलिंडर मौजूदा बाजार दर (गैर-सब्सिडी रेट) पर खरीदना होगा, जिससे मिलने वाली सब्सिडी राशि रुक जाएगी।

  • लक्ष्य: सरकार का उद्देश्य फर्जी कनेक्शनों और दुरुपयोग को रोककर केवल पात्र परिवारों तक सब्सिडी का लाभ पहुंचाना है। देश में अब तक लगभग 89.9% उपभोक्ता अपना वेरिफिकेशन करा चुके हैं।

2. बैंक FD के बदलेंगे नियम: 3 करोड़ रुपये से ऊपर माना जाएगा बल्क डिपॉजिट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए दिशा-निर्देशों के तहत बैंक में बल्क डिपॉजिट (Bulk Deposit) की सीमा 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 3 करोड़ रुपये या उससे अधिक कर दी गई है।

  • ब्याज दरों में पारदर्शिता: बैंक बल्क एफडी पर अपनी व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार अलग-अलग ब्याज दरें तय कर सकेंगे।

  • वेबसाइट पर रोजाना अपडेट: बैंकों को हर कार्य दिवस सुबह 10:00 बजे (10 मिनट के ग्रेस पीरियड यानी 10:10 AM तक) अपनी नई ब्याज दरें आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी होंगी।

  • एक समान दर: एक ही तिथि, समान अवधि और राशि वाली एफडी के लिए बैंक की सभी शाखाओं में एक जैसी ब्याज दर लागू होगी, जिससे शाखाओं के बीच का अंतर समाप्त होगा।

3. सख्त होंगे जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम

जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम के नए प्रावधान 1 अक्तूबर से देश भर में प्रभावी हो रहे हैं।

  • देरी पर कड़े नियम: यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण घटना घटने के 2 साल से अधिक समय बाद कराया जाता है, तो इसके लिए अब सीधे प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (First Class Judicial Magistrate) का आदेश प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

  • संसदीय मंजूरी: भारत के रजिस्ट्रार जनरल मृत्युंजय कुमार नारायण ने गजट अधिसूचना के जरिए इन कड़े नियमों के लागू होने की जानकारी दी है।

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