वॉशिंगटन/इस्लामाबाद: दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब उस मुहाने पर पहुंच गया है, जहां से युद्ध की वापसी नामुमकिन लग रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने तेवरों से स्पष्ट कर दिया है कि वे ईरान के मसले पर किसी भी नरम रुख के मूड में नहीं हैं। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा युद्धविराम (Ceasefire) खत्म होने से पहले कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो अमेरिकी वायुसेना ईरान पर भीषण बमबारी शुरू कर सकती है।
‘हमारी सेना तैयार, बस बटन दबाने की है देरी’
CNBC के मशहूर शो ‘स्क्वॉक बॉक्स’ (Squawk Box) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा, “हमारी सेना पूरी तरह से मुस्तैद है। हम किसी भी वक्त कार्रवाई के लिए तैयार हैं। मामला बहुत सीधा है—या तो मेज पर बैठकर समझौता करें या फिर बमबारी झेलने के लिए तैयार रहें।” ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि 22 अप्रैल को दोनों देशों के बीच जारी दो हफ्ते का सीजफायर खत्म होने जा रहा है।
ईरानी महिलाओं की रिहाई पर ट्रंप की ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट
एक तरफ जहां ट्रंप सैन्य हमले की धमकी दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने मानवीय आधार पर एक बड़ी मांग भी रख दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए ईरान से उन आठ महिलाओं को तत्काल रिहा करने की अपील की है, जिन्हें वहां फांसी दिए जाने की आशंका है। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान इन महिलाओं को छोड़ देता है, तो इसे बातचीत की एक सकारात्मक शुरुआत माना जा सकता है।
क्या सीजफायर बढ़ाना चाहते हैं ट्रंप?
फिलहाल चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ाने के सवाल पर ट्रंप का रुख नकारात्मक नजर आया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सीजफायर की आड़ में दोनों देशों ने केवल अपने हथियारों का जखीरा भरने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर हमला होता है, तो अमेरिका ईरान के पुलों, सैन्य अड्डों और मिसाइल ठिकानों को जमींदोज कर देगा, जिससे ईरान की सैन्य शक्ति को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
इस्लामाबाद में शांति की आखिरी कोशिश, जेडी वेंस भी पहुंचेंगे!
युद्ध के बादलों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस वक्त कूटनीति का केंद्र बनी हुई है। खबर है कि वहां अमेरिका और ईरान के बीच गुपचुप तरीके से शांति वार्ता की कोशिशें चल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) कर सकते हैं। हालांकि, ईरान की सरकारी मीडिया ने अभी तक किसी प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान पहुंचने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन ‘अल अरबिया’ का दावा है कि दोनों पक्ष जल्द ही आमने-सामने बैठ सकते हैं।
समुद्र से लेकर प्रतिबंधों तक छिड़ी है जंग
इस बीच जमीनी हालात भी तनावपूर्ण हैं। यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने ईरानी बंदरगाहों की ओर जा रहे 28 जहाजों को रोक दिया है। वहीं, यूरोपीय संघ ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा कर दी है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी स्थिति को ‘अत्यंत अस्थिर’ बताते हुए कहा है कि अगले 24 घंटे में हालात कुछ भी मोड़ ले सकते हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद और वॉशिंगटन पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति इस संभावित महायुद्ध को टाल पाएगी या नहीं।














