वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए मध्य पूर्व में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है। ओवल ऑफिस में मीडिया से रूबरू होते हुए ट्रंप ने साफ किया कि ईरान के साथ जारी युद्धविराम अब ‘लाइफ सपोर्ट सिस्टम’ पर है और यह किसी भी वक्त टूट सकता है। ट्रंप के इस आक्रामक रुख ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, जिससे आने वाले दिनों में सैन्य कार्रवाई की आशंका और गहरा गई है।
“ईरान के प्रस्ताव को मैंने पूरा पढ़ा तक नहीं”
ईरान द्वारा भेजे गए 14 सूत्री शांति प्रस्ताव पर तंज कसते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे “कचरे का टुकड़ा” करार दिया। उन्होंने कहा कि तेहरान की ओर से भेजी गई सामग्री बेहद घटिया और अस्वीकार्य है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान इस समय अपने इतिहास की सबसे कमजोर स्थिति में है और ऐसे “बेवकूफी भरे” प्रस्तावों पर बात करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए यह भी जोड़ा कि पूर्व राष्ट्रपति ओबामा या बाइडेन शायद इसे स्वीकार कर लेते, लेकिन उनके शासन में ऐसा मुमकिन नहीं है।
परमाणु हथियारों पर ट्रंप की दोटूक: ‘एक दिन में तबाह कर देंगे ईरान का निर्माण’
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ट्रंप ने अपनी सख्ती बरकरार रखी है। उन्होंने दोहराया कि ईरान के पास परमाणु हथियार कभी नहीं हो सकते क्योंकि वे दुनिया के लिए बहुत खतरनाक और अस्थिर हैं। ट्रंप ने चेतावनी दी कि युद्धविराम की अवधि में ईरान ने जो भी थोड़ा-बहुत सैन्य निर्माण किया है, अमेरिकी सेना उसे महज एक दिन के भीतर नेस्तनाबूद करने की क्षमता रखती है। उन्होंने अमेरिकी गोला-बारूद के भंडार को पहले से कहीं ज्यादा आधुनिक और घातक बताया।
ओबामा और बाइडेन प्रशासन पर साधा निशाना, नाकाबंदी को बताया ‘सैन्य प्रतिभा’
अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने पूर्ववर्ती अमेरिकी सरकारों पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो काम पिछले 47 वर्षों में अन्य राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था, वह अब अमेरिका कर रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व कई स्तरों पर ध्वस्त हो चुका है। उन्होंने वर्तमान नाकाबंदी की प्रशंसा करते हुए इसे ‘सैन्य प्रतिभा’ का हिस्सा बताया और कहा कि यह कार्रवाई पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी “सेवा” है।
परमाणु धूल हटाने की मांग: ट्रंप का दावा, ईरान बेबस हुआ
ट्रंप ने एक हैरान करने वाला दावा करते हुए कहा कि ईरान ने खुद अमेरिका से अपने एक परमाणु स्थल से ‘परमाणु धूल’ हटाने की मदद मांगी है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी हमलों ने उस जगह को इस कदर तबाह कर दिया है कि ईरान के पास उसे साफ करने के उपकरण तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल अमेरिका और चीन ही ऐसे देश हैं जो इतनी गहराई और भीषण हमले के बाद उस मलबे को निकाल सकते हैं।
ईरान का पलटवार: ‘अमेरिका के पास प्रस्ताव मानने के अलावा कोई चारा नहीं’
दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए झुकने से इनकार कर दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका के पास उनके 14 सूत्री प्रस्ताव को स्वीकार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका जितनी देर करेगा, उसके करदाताओं को उतनी ही भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। गालिबाफ ने किसी भी अन्य दृष्टिकोण को असफल और अनिर्णायक करार दिया है।















