UP Chunav 2027: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, यूपी में 3 साल से एक जिले में जमे अफसरों का होगा तबादला; जारी हुए सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक दलों की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) भी चुनावी तंत्र को चाक-चौबंद करने में जुट गया है। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावमुक्त बनाए रखने के लिए आयोग ने अधिकारियों के तबादलों और तैनाती को लेकर विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि गृह जिलों में तैनात और एक ही जगह लंबा कार्यकाल पूरा कर चुके अधिकारियों को तुरंत हटाया जाएगा।

गृह जिले में नहीं मिलेगी तैनाती, 3 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अफसरों पर गाज

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि चुनाव आयोग के नए नियमों के तहत चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े किसी भी अधिकारी को उसके गृह जनपद (Home District) में तैनात नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, जिन अफसरों ने पिछले चार वर्षों के दौरान (31 मई 2027 की कट-ऑफ तिथि तक) एक ही जिले में तीन साल का सेवाकाल पूरा कर लिया है, उन्हें भी उस जिले से स्थानांतरित किया जाएगा। आयोग का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के स्थानीय प्रभाव या पक्षपात की संभावना को समाप्त करना है।

पुलिस, प्रशासन से लेकर आबकारी विभाग तक के अधिकारियों के होंगे ट्रांसफर

निर्वाचन आयोग के इन कड़े निर्देशों का असर राज्य के कई प्रमुख प्रशासनिक और पुलिस विभागों पर पड़ेगा। आयोग की नीति के तहत राजस्व, पुलिस, आबकारी (Excise) और परिवहन विभाग के विभिन्न स्तरों के अधिकारियों का तबादला किया जाएगा। जो अधिकारी सीधे तौर पर मतदाता सूची, कानून व्यवस्था या मतदान प्रक्रिया के संचालन से जुड़े होते हैं, उन्हें इस दायरे में शामिल किया गया है। अधिकारियों की नई तैनाती तय करते समय उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड और गृह जनपद के डेटा का विशेष सत्यापन किया जाएगा।

30 नवंबर तक देनी होगी रिपोर्ट, यूपी समेत इन राज्यों के लिए भी निर्देश लागू

आयोग ने इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त समय-सीमा तय की है। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को 30 नवंबर तक स्थानांतरित और तैनात किए गए अधिकारियों की समेकित रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंपनी होगी। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने यह गाइडलाइन केवल उत्तर प्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों वाले अन्य राज्यों—गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड—के लिए भी एक साथ जारी की है।

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