ईरान-अमेरिका में छिड़ी ‘जुबानी जंग’: ट्रंप की दो टूक- ‘पागलों के हाथ में नहीं दे सकते परमाणु हथियार’, तेहरान ने दी युद्ध की चेतावनी

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया से एक बार फिर युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान और अमेरिका के बीच बरसों पुराना तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। ईरानी सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के साथ सैन्य टकराव कभी भी दोबारा शुरू हो सकता है। तेहरान का आरोप है कि वॉशिंगटन अपनी बातों से मुकर रहा है और समझौतों की धज्जियां उड़ा रहा है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने जलती आग में घी डालने का काम किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में खलबली मच गई है।

ईरानी सेना का दोटूक संदेश: ‘अमेरिका पर रत्तीभर भरोसा नहीं’

ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के मुताबिक, ईरानी सैन्य कमान के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद जाफर असदी ने अमेरिका की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। असदी ने कहा कि अमेरिका के मौजूदा संकेत यह साफ कर रहे हैं कि वह किसी भी स्थाई समझौते के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि ईरान को अब अमेरिका पर ‘रत्तीभर भी भरोसा’ नहीं बचा है। असदी के अनुसार, अमेरिका केवल अपनी गिरती साख को बचाने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बातचीत का ढोंग रच रहा है, जबकि पर्दे के पीछे वह केवल ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

ट्रंप की सख्त चेतावनी: ‘पागलों के हाथ में नहीं दे सकते परमाणु हथियार’

ईरान की इस नाराजगी के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने तेवर कड़े कर लिए हैं। ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, “हम पागलों के हाथ में परमाणु हथियार नहीं दे सकते।” ट्रंप का यह बयान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर उनकी सख्त नीति को दर्शाता है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान का नेतृत्व आंतरिक कलह से जूझ रहा है और वहां कई गुट आपस में बंटे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ऐसी शर्तें रख रहा है जिन्हें अमेरिका किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा।

हाई अलर्ट पर ईरानी सेना, ‘गलती’ हुई तो मिलेगा करारा जवाब

सीमाओं पर बढ़ते तनाव को देखते हुए ईरान ने अपनी सेना को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का आदेश दिया है। सैन्य अधिकारी असदी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने कोई भी ‘नई हरकत’ या सैन्य भूल की, तो ईरान उसका मुंहतोड़ जवाब देगा। तेहरान का मानना है कि अमेरिका केवल दुनिया को गुमराह करने के लिए बयानबाजी कर रहा है, लेकिन ईरानी नेतृत्व किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इस बयानबाजी ने संकेत दे दिए हैं कि बातचीत के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं।

क्या पश्चिम एशिया में छिड़ेगा महायुद्ध?

दोनों देशों के बीच बढ़ते इस वाकयुद्ध ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां ईरान जंग की संभावनाओं को खुला रख रहा है, वहीं अमेरिका का रुख भी समझौतावादी नहीं दिख रहा। जानकारों का मानना है कि अगर कूटनीतिक स्तर पर जल्द ही कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो यह तनाव एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें इन दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि यहां होने वाली छोटी सी चूक भी विश्व शांति के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

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