नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत अपनी खनिज सुरक्षा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने की तैयारी में है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की निर्बाध आपूर्ति को लेकर एक ऐतिहासिक द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इस समझौते की अंतिम रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिस पर 12 सितंबर की शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली उच्च स्तरीय बैठक में मुहर लगने की संभावना है। वहीं, 11 सितंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पीएम मोदी के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता में भी खनिजों की खोज को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है।
दुर्लभ खनिजों पर चीन की एकाधिकार: क्यों खास है भारत के साथ समझौता?
दुर्लभ खनिजों की श्रेणी में कुल 17 महत्वपूर्ण तत्व आते हैं। इनमें से स्कैंडियम, सैमरियम, डिस्प्रोसियम, टेरबियम, इट्रियम, गैडोलिनियम और ल्यूटेनियम जैसे 7 अति-महत्वपूर्ण तत्व चीन में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। वर्तमान में दुनिया भर में इन खनिजों की कुल उपलब्धता का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन के पास है, जिससे अमेरिका और यूरोपीय देशों सहित पूरी दुनिया आपूर्ति के लिए चीन पर निर्भर है। यदि भारत और चीन के बीच यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो भारतीय उद्योगों, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और ग्रीन एनर्जी सेक्टर को इन महत्वपूर्ण खनिजों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
भारत में 7.23 मिलियन टन का भंडार, लेकिन दोहन की चुनौती
भारत दुनिया भर में दुर्लभ खनिजों के मामले में तीसरे स्थान पर आता है और देश के पास वैश्विक भंडार का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है। भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग (GSI) ने भारत के 9 प्रमुख राज्यों—आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में कुल 7.23 मिलियन टन दुर्लभ खनिजों के भंडार की पहचान की है। हालांकि, आधुनिक तकनीक की कमी के कारण अब तक इनका पर्याप्त दोहन नहीं हो पाया है। घरेलू स्तर पर खोज और उत्खनन को रफ्तार देने के लिए भारत सरकार ने ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ (National Critical Mineral Mission) की शुरुआत की है।
रूस ने भी बढ़ाया मदद का हाथ: पेस्कोव बोले- ‘हमारे पास है विशेषज्ञता’
चीन के साथ आपूर्ति समझौते के अलावा, रूस ने भी भारत में दुर्लभ खनिजों की खोज और उत्खनन में तकनीकी सहायता प्रदान करने की पेशकश की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि खनिजों का दोहन एक जटिल और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें रूसी कंपनियों के पास गहरा अनुभव और विशेषज्ञता है। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा और 11 सितंबर को होने वाली द्विपक्षीय बैठक के दौरान रूसी कंपनियों की भागीदारी और तकनीकी हस्तांतरण पर प्रमुखता से चर्चा होगी।
















