अद्भुत प्रस्तुति के साथ वृंदावन की विष्णुप्रिया ने किया ओडिसी मंच पर प्रवेश

भास्कर समाचार सेवा

वृंदावन । ओडिसी नृत्य परंपरा में मंच प्रवेश किसी नृत्य साधक के जीवन का महत्वपूर्ण पल होता है। यह मंच पर नृत्य के एकल प्रस्तुतकर्ता के रूप में उसके जीवन के सफर की शुरुआत होता है। कुंजलता मिश्रा और गुरु श्री प्रताप नारायण की शिष्या एवं वृंदावन के प्रसिद्ध विद्वान आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी की पोती, विष्णुप्रिया गोस्वामी ने इस सफर पर कदम रख दिया है। रविवार को नई दिल्ली के मैक्समूलर मार्ग स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मेनऑडिटोरियम में विष्णुप्रिया ने मंचपर एकल प्रस्तुति से सबको मोहित कर दिया। खचाखच भरे सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट से सभी ने विष्णुप्रिया काअभिवादन किया। कार्यक्रम के दौरान पद्मश्री श्रीमति माधवीमुद्गल व पद्मश्री श्रीमति गीता चन्द्रन बतौर मुख्य आतिथि एवं नृत्यांगना पद्मश्री रंजना गौहर, कथक गुरु मंजूश्रीचटर्जी, अभिनेत्री सुषमासेठ, आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी आदि सहित कई गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे।

इस एकल प्रस्तुति के दौरान उन्होंने मंगलाचरण से मोक्ष तक की पूरी प्रस्तुति दी। ओडिसी मंच प्रवेश की प्रस्तुति की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मंगलाचरण से हुई। इसके बाद उन्होंने स्थायी की प्रस्तुति दी। इसमें ओडिशा के मंदिरों में स्थापित विभिन्न मूर्तियों की भावभंगिमाओं से प्रेरित प्रस्तुति दी जाती है। अभिनय खंड के दौरान विष्णुप्रिया ने अपनी भाव-भंगिमाओं के माध्यम से उड़िया काव्य भाचंपू को दर्शकों के समक्ष जीवंत कर दिया।

विष्णुप्रिया ने तीन साल कीआयु से ही ओडिसी सीखना प्रारंभ कर दिया था। उन्होंने प्रशिक्षण की शुरुआत गुरु केले चरण मोहपात्रा की परंपरा में की थी। बाद में कुंजलता ने उन्हें गुरु देबप्रसाद दास की परंपरा का गहन प्रशिक्षण दिया। 2006 में वृंदावन के राधारमन मंदिर में पहली प्रस्तुति से विष्णुप्रिया ने नृत्य का सफर शुरू किया था।

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