अलीगंज अग्निकांड : विवादित बिल्डिंग के ध्वस्तीकरण पर टला फैसला, एलडीए कोर्ट में आज शाम 4 बजे होगी अंतिम सुनवाई

लखनऊ: राजधानी के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड के बाद विवादों के घेरे में आई कमर्शियल बिल्डिंग पर लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) का फैसला एक बार फिर टल गया है। एलडीए की विहित प्राधिकारी अदालत में बुधवार को इस मामले पर अंतिम फैसला आना था, लेकिन ऐन वक्त पर भवन स्वामी की ओर से दाखिल की गई नई आपत्ति के बाद अदालत ने सुनवाई को अगले दिन के लिए टाल दिया। अब इस बेहद संवेदनशील मामले पर आज यानी गुरुवार, 9 जुलाई को शाम 4 बजे तीसरी बार सुनवाई होगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कोर्ट में दाखिल की विस्तृत आपत्ति

बुधवार को तय समय पर शुरू हुई अदालती कार्रवाई के दौरान भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवांश मेहरोत्रा ने अदालत के समक्ष एक विस्तृत कानूनी आपत्ति पत्र दाखिल किया। अधिवक्ता ने कोर्ट से इस आपत्ति पर अपना पूरा पक्ष मजबूती से रखने के लिए कुछ और समय दिए जाने की मांग की। मामले की संवेदनशीलता और कानूनी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए विहित प्राधिकारी अदालत ने भवन स्वामी को मोहलत देते हुए मामले की अगली तारीख 9 जुलाई तय कर दी।

आवासीय नक्शे पर तान दी 3 मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग

एलडीए की जांच रिपोर्ट में इस विवादित इमारत को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच के मुताबिक:

  • सेक्टर-डी, अलीगंज स्थित इस 185 वर्गमीटर के भूखंड का साल 2014 में पूरी तरह से ‘आवासीय भवन’ के रूप में नक्शा पास कराया गया था।

  • भवन स्वामियों पर आरोप है कि उन्होंने स्वीकृत मानचित्र (Sanctioned Map) की शर्तों का सरेआम उल्लंघन किया।

  • बिल्डिंग के अनिवार्य सेटबैक (खुले क्षेत्र) को पूरी तरह कवर कर दिया गया और बेसमेंट से लेकर तीसरी मंजिल तक अवैध रूप से व्यावसायिक निर्माण कर लिया गया।

  • करीब 10 सालों से मास्टर प्लान के नियमों को ताक पर रखकर इस आवासीय श्रेणी के भूखंड का धड़ल्ले से कमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा था।

15 बच्चों की मौत के बाद जागा प्रशासन, आज आ सकता है अंतिम फैसला

गौरतलब है कि बीते 22 जून को इसी अवैध इमारत में अचानक भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों में फंसे 15 मासूम बच्चों की दम घुटने से मौत हो गई थी। इस दिल दहला देने वाले अग्निकांड के बाद पूरी इमारत की वैधता, निर्माण के घटिया मानकों और पूरी तरह नदारद अग्नि सुरक्षा (Fire Safety) व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। चौतरफा दबाव के बाद हरकत में आए एलडीए ने भवन स्वामियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की विधिक प्रक्रिया शुरू की।

अब पूरे शहर और प्रदेश की नजरें आज शाम 4 बजे होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। एलडीए अदालत को आज यह तय करना है कि इस विवादित और जानलेवा साबित हुई बिल्डिंग को गिराने (ध्वस्तीकरण) के आदेश पर मुहर लगाई जाए, या फिर भवन स्वामियों की दलीलों के आधार पर उन्हें कोई कानूनी राहत मिलेगी। इस फैसले को भविष्य में अवैध कमर्शियल बिल्डिंगों के खिलाफ होने वाली प्रशासनिक कार्रवाइयों के लिए एक नजीर माना जा रहा है।

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