मोदी कैबिनेट विस्तार: मॉनसून सत्र से पहले महा-फेरबदल की तैयारी, इन दिग्गजों की हो सकती है छुट्टी, चुनावी राज्यों पर बड़ा दांव

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में बहुत जल्द एक बड़ा और व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज हैं और माना जा रहा है कि अगले कुछ ही दिनों में मोदी कैबिनेट के विस्तार की आधिकारिक घोषणा हो सकती है। इस आगामी विस्तार में जहां कई नए और युवा चेहरों को देश की मुख्यधारा की राजनीति में मौका मिलने की उम्मीद है, वहीं खराब प्रदर्शन करने वाले या सांगठनिक जिम्मेदारी संभालने वाले कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी होना भी लगभग तय माना जा रहा है।

मॉनसून सत्र से पहले आ सकती है नई टीम

सूत्रों के मुताबिक, इस महा-मंत्रिमंडल विस्तार का पूरा रोडमैप तैयार कर लिया गया है। समय को लेकर भी कयासों का दौर जारी है। 11 जुलाई तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम और दौरे पहले से तय हैं। वहीं, संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। ऐसे में यह पूरी तरह मुमकिन माना जा रहा है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले पीएम मोदी अपनी नई टीम का ऐलान कर दें ताकि नए मंत्रियों को सदन की कार्यवाही से पहले अपनी भूमिका समझने का वक्त मिल सके।

जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की मजबूरी

देश की सियासत में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि इस बार मोदी सरकार किन समीकरणों को प्राथमिकता देगी। बीजेपी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस बात पर आम सहमति बनती दिख रही है कि कुछ बेहद अहम मंत्रालयों में नए और ऊर्जावान चेहरों को शामिल किया जाए। इसके साथ ही, क्षेत्रीय संतुलन, राज्यवार प्रतिनिधित्व, जातीय समीकरण और पार्टी के प्रति राजनीतिक निष्ठा को ध्यान में रखकर मंत्रिपरिषद को संतुलित करने की एक बड़ी राजनीतिक मजबूरी भी शीर्ष नेतृत्व के सामने है।

‘एक व्यक्ति, एक पद’ नियम से बदलेंगे चेहरे

इस फेरबदल में बीजेपी के सांगठनिक सिद्धांतों का असर भी साफ देखने को मिलेगा। वर्तमान कैबिनेट में शामिल पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली का बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में पूरी संभावना है कि बीजेपी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के अपने कड़े नियम का पालन करते हुए इन दोनों नेताओं को केंद्रीय मंत्री पद से मुक्त कर सकती है ताकि ये राज्यों में संगठन को मजबूत कर सकें।

इसके अलावा, जॉर्ज कुरियन पहले ही केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि एक अन्य प्रमुख केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में बिट्टू भी देर-सबेर मंत्री पद छोड़ सकते हैं। इन रिक्तियों को मिलाकर और पहले से खाली चल रहे 9 मंत्री पदों को जोड़कर कुल 13 नए मंत्रियों के लिए सीधे तौर पर जगह बन रही है। वर्तमान में मोदी सरकार में कुल 72 मंत्री हैं (31 कैबिनेट, 5 स्वतंत्र प्रभार और 36 राज्यमंत्री), जबकि नियमों के अनुसार अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

आगामी विधानसभा चुनावों पर टिकीं नजरें

इस कैबिनेट विस्तार का मुख्य फोकस उन राज्यों पर रहने वाला है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात जैसे सात राज्यों में सियासी चुनावी बिसात बिछने वाली है। यूपी, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में साल के शुरुआती महीनों में ही चुनाव हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश और गुजरात में साल के अंत में मतदान होगा। चुनावी राज्यों के सियासी समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए पीएम मोदी नई कैबिनेट में इन राज्यों का प्रतिनिधित्व काफी हद तक बढ़ा सकते हैं। उत्तराखंड से दलित चेहरा और परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा का कद इस फेरबदल में बढ़ाया जा सकता है या राज्य से किसी अन्य नए चेहरे को मौका मिल सकता है।

यूपी और पंजाब के रण को जीतने का मास्टरप्लान

उत्तर प्रदेश से मौजूदा समय में प्रधानमंत्री सहित 10 मंत्री केंद्र सरकार में शामिल हैं। साल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के रण को साधने के लिए इस बार पश्चिमी यूपी को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा स्थान मिल सकता है। हाल के दिनों में पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ तक का पूरा ध्यान पश्चिमी यूपी पर केंद्रित रहा है। इसके साथ ही सूबे के सामाजिक समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए ओबीसी और दलित समुदाय से कुछ नए चेहरों की एंट्री तय मानी जा रही है।

वहीं पंजाब की बात करें तो वहां अकाली दल से अलग होने के बाद बीजेपी अपने दम पर सरकार बनाने की तैयारियों में जुटी है। पंजाब से फिलहाल रवनीत सिंह बिट्टू इकलौते मंत्री हैं, जो लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद सिख चेहरे के तौर पर टीम मोदी का हिस्सा बने थे। इनके अलावा सिख समाज से आने वाले हरदीप पुरी यूपी कोटे से मंत्री हैं। माना जा रहा है कि पंजाब में सिखों और स्थानीय समीकरणों को साधने के लिए आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में आए किसी राज्यसभा सदस्य सहित 2 से 3 नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।

बागी सांसदों और सहयोगियों को मिल सकता है इनाम

पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों का असर भी इस विस्तार में दिखेगा। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) में विलय किया है और मोदी सरकार को बिना शर्त समर्थन दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या टीएमसी के इन बागी सांसदों में से किसी को केंद्रीय मंत्री पद का तोहफा मिलेगा।

महाराष्ट्र में भी शिवसेना (UBT) को बड़ा झटका देते हुए 9 में से 6 लोकसभा सांसद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट के साथ आ गए हैं, जिससे एनडीए में शिंदे गुट का पलड़ा भारी हो गया है। इस वजह से शिंदे कोटे से केंद्रीय मंत्रिमंडल में एक या दो नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।

बिहार की राजनीति में हुए हालिया ऐतिहासिक उलटफेर के बाद वहां से भी मंत्रियों की संख्या बढ़नी तय है। नीतीश कुमार के बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और सम्राट चौधरी के नया सीएम बनने के बाद समीकरण बदल चुके हैं। अब नीतीश कुमार के राज्यसभा चुने जाने के बाद यह कयास जोरों पर हैं कि उन्हें मोदी कैबिनेट में एक बेहद अहम और महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपकर केंद्र की राजनीति में सक्रिय किया जा सकता है।

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