नए विश्लेषण में खुलासा: जलवायु नीतियों को लेकर भारतीय इस्पात उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से अधिक सकारात्मक

नई दिल्ली। -एक नए विश्लेषण के अनुसार, भारत की प्रमुख इस्पात कंपनियां जलवायु और ऊर्जा संबंधी नीतियों पर जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियों की तुलना में अधिक रचनात्मक और सकारात्मक रुख अपना रही हैं। यह निष्कर्ष वैश्विक थिंक टैंक इन्फ्लुएंसमैप (InfluenceMap) द्वारा मंगलवार (30 जून, 2026) को जारी एक नई रिपोर्ट में सामने आया है।
यह अध्ययन वर्ष 2021 से 2026 के दौरान भारत की पांच सबसे बड़ी प्राथमिक इस्पात कंपनियों—टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, आर्सेलरमित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AM/NS India), जिंदल स्टील लिमिटेड और सेल (SAIL)—के साथ-साथ इंडियन स्टील एसोसिएशन की जलवायु और ऊर्जा नीतियों पर भागीदारी का विश्लेषण करता है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय इस्पात उद्योग की नीति संबंधी भागीदारी पेरिस जलवायु समझौते के तापमान लक्ष्यों के अनुरूप आंशिक रूप से मेल खाती है और वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में जलवायु एवं ऊर्जा नीतियों के प्रति अधिक सहयोगात्मक दृष्टिकोण दर्शाती है।

रिपोर्ट में सबसे बड़ा अंतर यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लेकर देखने को मिला। जहां जापान और दक्षिण कोरिया की इस्पात कंपनियों ने इस व्यवस्था का विरोध किया और अपने देशों में कार्बन मूल्य निर्धारण (Carbon Pricing) को कमजोर करने का प्रयास किया, वहीं भारतीय कंपनियों ने अपेक्षाकृत अधिक संतुलित और सकारात्मक रुख अपनाया। इनमें से कई कंपनियों ने भारत में उत्सर्जन कम करने के लिए घरेलू कार्बन प्राइसिंग और जलवायु नीति ढांचे के निर्माण का समर्थन किया।
यह निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आया है जब भारत का ग्रीन स्टील फ्रेमवर्क तेजी से आगे बढ़ रहा है। ग्रीन स्टील टैक्सोनॉमी, जिसकी घोषणा दिसंबर 2024 में की गई थी, दुनिया की अपनी तरह की पहली पहल थी। इसके बाद फरवरी 2026 में AM/NS इंडिया इस मानक के तहत प्रमाणित होने वाली देश की पहली एकीकृत इस्पात निर्माता कंपनी बनी।

भारत वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कच्चा इस्पात उत्पादक है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि वर्ष 2050 तक वैश्विक इस्पात उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा भारत से आएगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय इस्पात क्षेत्र बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्टिंग (BRSR) ढांचे के माध्यम से अन्य भारतीय उद्योगों की तुलना में अपनी जलवायु नीति संबंधी गतिविधियों का अधिक विस्तृत खुलासा करता है। हालांकि, वैश्विक निवेशकों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए विशिष्ट नीतियों पर और अधिक पारदर्शिता की आवश्यकता है।

इन्फ्लुएंसमैप की विश्लेषक तन्वी रहीम ने कहा,
“भारतीय इस्पात उद्योग देश के इस्पात क्षेत्र को डीकार्बोनाइज (कार्बन उत्सर्जन कम) करने वाली नीतियों के प्रति अधिक सकारात्मक रूप से जुड़ रहा है। विशेष रूप से कई कंपनियां घरेलू कार्बन प्राइसिंग प्रणाली का समर्थन कर रही हैं। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े कच्चे इस्पात उत्पादक के रूप में भारत वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले उद्योगों में से एक के डीकार्बोनाइजेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस परिवर्तन को सफल बनाने के लिए भारतीय इस्पात उद्योग का सहयोग बेहद आवश्यक होगा।”

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