
पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (TMC) खेमे की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। नंदीग्राम सीट से प्रत्याशी संचिता प्रधान डे के कदम पीछे खींचने के बाद अब रेजीनगर से पार्टी उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी चुनावी मैदान छोड़ने का बड़ा फैसला लिया है। दोनों ही महत्वपूर्ण सीटों पर आगामी 6 अक्टूबर को मतदान होना है, ऐसे में दो बड़े उम्मीदवारों के हटने से चुनावी समीकरण पूरी तरह गरमा गए हैं।
कम समय और नया चुनाव चिह्न बना नामांकन वापसी की मुख्य वजह
शनिवार सुबह मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए रबीउल आलम चौधरी ने अपने इस अचानक फैसले की वजह साफ की। उन्होंने बताया कि मतदान में अब बहुत ही कम वक्त बचा है, जिसके चलते इतने कम समय में नए चुनाव चिह्न को हर मतदाता तक पहुंचाना और उससे परिचित कराना बेहद मुश्किल काम था। पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ मैराथन बैठक के बाद ही यह निर्णय लिया गया है, जिसकी औपचारिक सूचना शीर्ष नेतृत्व को भेज दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल कार्यकर्ताओं को प्रचार मैदान में नहीं उतारा जा रहा है।
नंदीग्राम में हाई-वोल्टेज ड्रामा: प्रत्याशी की वापसी के बाद कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी से गरमाई राजनीति
इससे पहले नंदीग्राम सीट पर भी बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला था, जब तृणमूल प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना पर्चा वापस ले लिया। संचिता की मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से हुई मुलाकात के तुरंत बाद यह घटनाक्रम सामने आया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को अपना समर्थन देने का ऐलान किया। हालांकि, इस समर्थन के महज कुछ ही घंटों भीतर नंदीग्राम पुलिस ने मिलन प्रधान को वर्ष 2007 के ऐतिहासिक भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया।
राहुल गांधी ने बोला तीखा हमला, भाजपा ने आरोपों को किया खारिज
कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की ऐन चुनाव से पहले हुई गिरफ्तारी पर राष्ट्रीय राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सीधे तौर पर ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल निष्पक्ष चुनाव कराने में विश्वास नहीं रखता और विपक्ष को साजिश के तहत चुनावी प्रक्रिया से बाहर धकेलने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस ने केवल अदालत द्वारा जारी लंबित वारंट के आधार पर कानून सम्मत कार्रवाई की है।
चुनाव चिह्न आवंटन को लेकर दो गुटों में छिड़ी जुबानी जंग
इन तमाम सियासी घटनाक्रमों के बीच तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी खेमों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर भी घमासान मचा हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव के लिए दोनों ही गुटों को अलग-अलग पहचान और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। आयोग की ओर से ममता बनर्जी के खेमे को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ का नया नाम और चुनावी निशान के तौर पर ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ आवंटित किया गया है।












